बठेना में ‘अभिव्यक्ति 2026’ का भव्य आयोजन: मिनीमाता बालिका समूह की बेटियों ने पेश की नारी सशक्तिकरण की मिसाल


बठेना। ग्रामीण अंचल में प्रतिभाओं को मंच देने और नारी शक्ति का परचम लहराने के उद्देश्य से मिनीमाता बालिका समूह द्वारा वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव ‘अभिव्यक्ति 2026’ का गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में न केवल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोक कला और देशभक्ति के रंगों से पूरा वातावरण सराबोर रहा।

समूह की बेटियों ने संभाली कमान
इस भव्य महोत्सव को सफल बनाने में मिनीमाता बालिका समूह की सक्रिय सदस्य तनु माण्डले, रूचि वर्मा, पायल निषाद, हर्षिता पाल, मनीषा वर्मा और हुलसी वर्मा की मुख्य भूमिका रही। इन बालिकाओं ने न केवल कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की, बल्कि अतिथियों के स्वागत से लेकर मेधावी छात्रों के लिए विशेष मेडल तैयार करने तक की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।
अतिथियों का स्वागत और दीप प्रज्वलन
कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान की देवी माँ सरस्वती के पूजन-वंदन और राजगीत ‘अरपा पैरी के धार’ के मधुर गायन के साथ हुआ। मिनीमाता बालिका समूह की सदस्यों ने पारंपरिक रीति-रिवाज से अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में सुश्री ऊनिका वर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती सीता सुरेश निषाद ने की। विशिष्ट अतिथियों में पंच रजनी यादव, श्री कृष्ण कुमार माण्डले, सुजान सिंह वर्मा (भूतपूर्व सरपंच), लीलाधर वर्मा, श्रीमती साधना वर्मा (भूतपूर्व सरपंच) एवं राजेश वर्मा सहित नगर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
मेधावी छात्र हुए पुरस्कृत
सत्र 2024 एवं 2025 की कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह दिन यादगार रहा। उन्हें मुख्य अतिथि सुश्री ऊनिका वर्मा एवं श्रीमती सीता सुरेश निषाद के कर-कमलों से मिनीमाता बालिका समूह द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए मेडल प्रदान किए गए।
नारी सशक्तिकरण की गूँज
अतिथियों ने अपने संबोधन में बालिकाओं के इस प्रयास की मुक्तकंठ से प्रशंसा की:
सुश्री ऊनिका वर्मा: “मिनीमाता बालिका समूह का यह प्रयास सराहनीय है। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए समूह ने जो बीड़ा उठाया है, वह समाज के लिए एक प्रेरणा है।”
श्रीमती सीता सुरेश निषाद: “यह आयोजन नारी सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण है। जब बेटियां संगठित होकर समाज सुधार का कार्य करती हैं, तो बदलाव निश्चित है।”
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखा छत्तीसगढ़ का वैभव
रंगारंग कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी लोककला, नारी शक्ति और देशभक्ति पर आधारित नृत्य व गीतों की शानदार प्रस्तुति दी। प्रतियोगिता में कड़े मुकाबले के बाद परिणामों की घोषणा की गई:
प्रथम स्थान: बारहमासी (लोक संस्कृति की सुंदर प्रस्तुति)।
द्वितीय स्थान: नारी शक्ति की विकास यात्रा (ज्ञान से गगन तक)।
तृतीय स्थान: देवी जोहार डांस (शक्ति आराधना)।
चतुर्थ स्थान: रामायण की झलकियां (बालकों द्वारा प्रस्तुत)।
विजेताओं को विशेष शिक्षण किट (डॉक्यूमेंट फाइल, पेन, कॉपी और कंपास पाउच) भेंट कर प्रोत्साहित किया गया।
भावुक कर गया ‘अनुभव की पाठशाला’ का संदेश
कार्यक्रम के अंत में श्री कृष्ण कुमार माण्डले ने अपने प्रेरक उद्बोधन से सभी को भावविभोर कर दिया। उन्होंने समाज में बेटियों के महत्व पर जोर देते हुए एक मार्मिक शेर साझा किया:
“बोए जाते हैं बेटे, पर उग जाती हैं बेटियाँ,
खाद-पानी बेटों को, पर लहराती हैं बेटियाँ।”
उन्होंने कहा कि आज बेटियां हर क्षेत्र में बेटों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं और बठेना का नाम रोशन कर रही हैं। अंत में आभार प्रदर्शन के साथ इस सफल महोत्सव का समापन हुआ।