अंडा। शैलदेवी महाविद्यालय, अण्डा में हिंदी विभाग के तत्वावधान में ‘हिंदी दिवस समारोह–2026’ का गरिमामय आयोजन ‘हिंदी : भारतीय ज्ञान, संस्कृति और संवेदना की भाषा’ विषय पर संपन्न हुआ। समारोह में हिंदी को भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृति, साहित्य और मानवीय संवेदना की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में रेखांकित किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. के एन मिश्रा ने मुख्य वक्ता आचार्य महेशचंद्र शर्मा, वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं सेवानिवृत्त प्राचार्य, का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत करते हुए स्वागत भाषण दिया।

मुख्य अतिथि राजन कुमार दुबे, चेयरमैन, शैलदेवी महाविद्यालय, अण्डा ने अपने उद्बोधन में हिंदी की वर्तमान स्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि हम प्रतिवर्ष हिंदी दिवस मनाते हैं, फिर भी हिंदी का अपेक्षित विकास क्यों नहीं हो पा रहा है—इसके कारणों पर आत्ममंथन आवश्यक है। क्षेत्रीयतावाद, भाषावाद अथवा हमारी अपनी उदासीनता—कारण चाहे जो हो, जब तक हिंदी को व्यवहार, आचरण और संभाषण में अपनी दिनचर्या का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा, तब तक हिंदी केवल एक भाषा बनकर रह जाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि “आप स्वयं सशक्त बनिए, तभी आपकी भाषा भी सशक्त होगी और विश्व हिंदी को एकमत से स्वीकार करेगा।” उन्होंने शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक के संदर्भ से भाषा की शक्ति और महत्व को स्पष्ट करते हुए विद्यार्थियों को भाषा को जीवन और व्यवहार से जोड़ने का संदेश दिया।

इसके पश्चात मुख्य वक्ता आचार्य महेशचंद्र शर्मा ने मुख्य अतिथि को महाविद्यालय के नाम अपनी दो पुस्तकें ‘छत्तीसगढ़ में संस्कृत’ एवं ‘साहित्य और समाज’ भेंट की। अपने सारगर्भित उद्बोधन में उन्होंने श्रीगणेश को विश्व के उत्कृष्ट लेखक के रूप में निरूपित करते हुए भारतीय साहित्य और ज्ञान-परंपरा की गौरवशाली विरासत पर प्रकाश डाला और कहा कि भाषा मनुष्य की भावनाओं, विचारों और अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

शिव-पार्वती संवाद, रामायण, रामचरितमानस, उपनिषद, महाभारत एवं वेदादि भारतीय ग्रंथों के संदर्भों के माध्यम से उन्होंने भाषा के भीतर निहित भारतीय ज्ञान, जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों को विद्यार्थियों के समक्ष प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान-परंपरा में भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि मानव उत्थान और जीवन को संस्कारित करने का साधन रही है।
अंत में हिंदी के सहायक प्राध्यापक होलेश्वर कुमार देशमुख ने विषय की मूल भावना को रेखांकित करते हुए आभार-प्रदर्शन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री राजन कुमार दुबे द्वारा मुख्य वक्ता आचार्य महेशचंद्र शर्मा को शॉल, श्रीफल एवं प्रतीक-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन सहायक प्राध्यापक (वाणिज्य) जितेश मिश्रा ने किया। समारोह में महाविद्यालय के बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक एवं श्रोतागण उपस्थित रहे। समूचा आयोजन इस संदेश के साथ सार्थक हुआ कि हिंदी का गौरव केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि उसे अपने व्यवहार, विचार और जीवन की भाषा बनाने में है।






