कैसे IPL बना वैश्विक क्रिकेट का BOSS : ICL से टकराव के बाद कैसे बनी योजना….साल दर साल चढ़ता गया परवान,पढ़िए IPL की पूरी कहानी

स्पोर्ट डेस्क सीजी मितानसाल 2007 में बागी आईसीएल का जवाब देने के लिए शुरू हुआ आईपीएल आज दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अमीर क्रिकेट लीग बन चुका है। फिक्सिंग विवाद और ललित मोदी प्रकरण जैसे कई झटकों के बावजूद इसकी लोकप्रियता और कमाई लगातार बढ़ी है। 10 टीमों की प्रतिस्पर्धा, डब्ल्यूपीएल की सफलता और विदेशी लीगों में भारतीय मालिकों की बढ़ती मौजूदगी ने आईपीएल को वैश्विक क्रिकेट का सबसे प्रभावशाली ब्रांड बना दिया।

भारत में क्रिकेट को लेकर दीवानगी कोई नई बात नहीं है, लेकिन अगर पिछले दो दशकों में किसी एक घटना ने भारतीय क्रिकेट की दिशा और दशा दोनों को सबसे ज्यादा बदला है, तो वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) है। आज आईपीएल सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि खेल, मनोरंजन, प्रसारण, विज्ञापन और निवेश की दुनिया का एक ऐसा मॉडल है, जिसने क्रिकेट को पूरी तरह बदल दिया है। हर साल करोड़ों दर्शक टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसे देखते हैं, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी इसमें हिस्सा लेने के लिए अपनी राष्ट्रीय टीमों के कार्यक्रमों तक को प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित करते हैं और इसके मीडिया अधिकार करोड़ों में बिकते हैं।

आईपीएल की यह सफलता अचानक नहीं आई। इसके पीछे एक लंबी कहानी है, जिसमें एक निजी क्रिकेट लीग की चुनौती, बीसीसीआई की रणनीति, कानूनी लड़ाइयां, विवाद, स्पॉट फिक्सिंग, टीमों का आना-जाना और लगातार बढ़ता कारोबार शामिल है। आईपीएल की कहानी को समझने के लिए हमें 2007 में लौटना होगा, जब भारतीय क्रिकेट के सामने पहली बार एक ऐसी चुनौती खड़ी हुई जिसने बीसीसीआई को अपने इतिहास का सबसे बड़ा दांव खेलने पर मजबूर कर दिया।

आईसीएल: वह चुनौती जिसने आईपीएल की नींव रखी

शुरुआत 2007 से होती है जब 24 सितंबर को पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में पांच रन से जीत दर्ज कर अपना पहला टी20 विश्व कप का खिताब जीता था। उस वक्त देश में बैठे रसूखदारों ने फटाफट क्रिकेट की लोकप्रियता को भांप लिया और एक नई लीग बनाने का विचार किया। इसी साल तीन अप्रैल को मीडिया समूह एसेल ग्रुप ने इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) की घोषणा की, जिसकी औपचारिक शुरुआत 27 जुलाई 2007 को हुई। यह एक निजी क्रिकेट लीग थी, जिसे बीसीसीआई और आईसीसी की मान्यता प्राप्त नहीं थी। उस समय क्रिकेट की दुनिया पूरी तरह राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्डों के नियंत्रण में चलती थी और किसी निजी संगठन द्वारा इतनी बड़ी लीग शुरू करना अपने आप में एक साहसिक कदम माना गया।

आईसीएल ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाड़ियों को जोड़ते हुए शहर आधारित टीमों का गठन किया। पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव इस लीग के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। लीग में कई पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों को कोच, सलाहकार और प्रशासक के रूप में जोड़ा गया। आयोजकों का मानना था कि टी20 क्रिकेट के तेजी से बढ़ते आकर्षण को देखते हुए निजी क्षेत्र में भी एक सफल क्रिकेट लीग विकसित की जा सकती है।

बीसीसीआई सचिव ने दे डाली थी प्रतिबंध की धमकी

तत्कालीन बीसीसीआई अध्यक्ष शरद पवार (2005-2008) ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र पर सीधी चुनौती माना। यही वजह थी कि बीसीसीआई ने शुरुआत से ही आईसीएल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। आईसीएल में खेलने वाले खिलाड़ियों को आधिकारिक क्रिकेट से बाहर करने की चेतावनी दी गई। बीसीसीआई के तत्कालीन सचिव निरंजन शाह ने यहां तक कह दिया था कि जो भी खिलाड़ी आईसीएल में हिस्सा लेंगे उन पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। उन्होंने कहा था, ‘हमारा रुख एकदम साफ़ है। जो खिलाड़ी आईसीएल में हिस्सा लेंगे, वे फिर कभी देश के लिए खेलने के योग्य नहीं होंगे। अब यह खिलाड़ियों को ही तय करना है कि वे क्या करना चाहते हैं।’ उन्होंने कहा था जो खिलाड़ी अभी तक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेले हैं, और आईसीएल में भाग लेते हैं उन पर भी यह प्रतिबंध लागू होगा।

आईसीएल और बीसीसीआई के बीच टकराव जल्द ही कानूनी लड़ाई में बदल गया। आईसीएल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि बीसीसीआई खिलाड़ियों और क्रिकेट संघों पर दबाव बना रहा है तथा लीग के संचालन में बाधाएं पैदा कर रहा है। दूसरी ओर बीसीसीआई का तर्क था कि आईसीएल आधिकारिक क्रिकेट ढांचे का हिस्सा नहीं है और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय क्रिकेट व्यवस्था से अलग नहीं होने दिया जा सकता। इस विवाद ने भारतीय क्रिकेट में पहली बार यह सवाल खड़ा किया कि खेल पर नियंत्रण किसका होना चाहिए, राष्ट्रीय बोर्ड का या बाजार की ताकतों का। हालांकि कानूनी लड़ाई चलती रही, लेकिन वास्तविकता यह थी कि बीसीसीआई आर्थिक और प्रशासनिक रूप से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में था।

टी20 विश्व कप ने बदल दी तस्वीर

साल 2007 में दक्षिण अफ्रीका में पहला आईसीसी टी20 विश्व कप खेला गया। भारतीय टीम युवा थी और बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि वह टूर्नामेंट जीत पाएगी। लेकिन महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने खिताब जीता। इस जीत ने भारतीय क्रिकेट की दिशा बदल दी। अचानक टी20 क्रिकेट देश में सबसे लोकप्रिय प्रारूप बन गया। स्टेडियम भरने लगे, टीवी दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और क्रिकेट को एक नए मनोरंजन उत्पाद के रूप में देखा जाने लगा। उधर आईसीएल अपने पैर पसार रहा था। बीसीसीआई ने भी बहुत जल्दी समझ लिया कि टी20 क्रिकेट का व्यावसायिक भविष्य बेहद बड़ा है। यही वह लम्हा था जिसने आईपीएल के जन्म का रास्ता तैयार किया।

बीसीसीआई ने 13 सितंबर 2007 को इंडियन प्रीमियर लीग की घोषणा कर दी। इस परियोजना के सबसे प्रमुख चेहरे तत्कालीन बीसीसीआई उपाध्यक्ष ललित मोदी थे। उन्होंने अमेरिकी खेल लीगों के फ्रेंचाइजी मॉडल को भारतीय क्रिकेट में लागू करने का प्रस्ताव रखा। शहर आधारित टीमें बनाई जानी थीं, खिलाड़ियों की नीलामी होनी थी, निजी निवेशकों को फ्रेंचाइजी अधिकार दिए जाने थे और दुनिया भर के स्टार खिलाड़ियों को एक मंच पर लाया जाना था। उस समय बहुत से लोगों को यह प्रयोग जोखिम भरा लगा। लेकिन बीसीसीआई को विश्वास था कि भारतीय बाजार, क्रिकेट की लोकप्रियता और टी20 प्रारूप का आकर्षण मिलकर इसे सफल बना सकते हैं।

आईपीएल का बॉलीवुड कनेक्शन

आईपीएल को सिर्फ क्रिकेट लीग नहीं, बल्कि एक बड़े मनोरंजन ब्रांड के रूप में स्थापित करने में बॉलीवुड की भूमिका भी बेहद अहम मानी जाती है। लीग की शुरुआत के समय बीसीसीआई और आयोजकों को समझ आ गया था कि अगर क्रिकेट को फिल्मी ग्लैमर और सेलिब्रिटी कल्चर के साथ जोड़ा जाए तो इसकी पहुंच पारंपरिक खेल दर्शकों से कहीं आगे जा सकती है। यही वजह रही कि शाहरुख खान ने जूही चावला और जय मेहता के साथ मिलकर कोलकाता नाइट राइडर्स में निवेश किया, जबकि प्रीति जिंटा पंजाब फ्रेंचाइजी का चेहरा बनीं। बाद में शिल्पा शेट्टी भी राजस्थान रॉयल्स से जुड़ीं। इन सितारों की मौजूदगी ने इस लीग को सिर्फ खेल प्रतियोगिता नहीं रहने दिया, बल्कि इसे एक ऐसे स्पोर्ट्स-एंटरटेनमेंट शो में बदल दिया जिसमें मैच के साथ-साथ ग्लैमर, सेलिब्रिटी संस्कृति और फैन कनेक्शन भी शामिल था।

पहली फ्रेंचाइजी नीलामी और करोड़ों की बारिश

24 जनवरी 2008 को आईपीएल फ्रेंचाइजियों की नीलामी हुई। आठ टीमों के अधिकार बेचे गए और उम्मीद से कहीं अधिक बोली लगी। मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स, कोलकाता नाइट राइडर्स, राजस्थान रॉयल्स, दिल्ली डेयरडेविल्स, किंग्स इलेवन पंजाब, डेक्कन चार्जर्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (पहले- रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर) पहली आठ फ्रेंचाइजी बनीं। फ्रेंचाइजी बिक्री से बीसीसीआई को लगभग 724 मिलियन डॉलर की राशि प्राप्त हुई। उस समय यह आंकड़ा खेल जगत में चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद खिलाड़ियों की नीलामी हुई। पहली बार क्रिकेटरों की खुली बोली लग रही थी। महेंद्र सिंह धोनी, युवराज सिंह, एंड्रयू फ्लिंटॉफ, जैक्स कैलिस, एडम गिलक्रिस्ट और शेन वॉर्न जैसे बड़े नाम फ्रेंचाइजियों के साथ जुड़े। क्रिकेट का आर्थिक मॉडल तेजी से बदल रहा था।

पहला सीजन और ब्रेंडन मैकुलम का तूफान

18 अप्रैल 2008 को आईपीएल का पहला मैच खेला गया। केकेआर के बल्लेबाज ब्रेंडन मैकुलम ने आरसीबी के खिलाफ 158 रन की नाबाद पारी खेली। यह सिर्फ एक शानदार बल्लेबाजी प्रदर्शन नहीं था, बल्कि दुनिया के लिए एक संदेश था कि आईपीएल कुछ अलग करने आया है। पहले सीजन में दर्शकों का जबरदस्त समर्थन मिला। टीवी रेटिंग्स उम्मीद से कहीं ज्यादा रहीं और विज्ञापनदाताओं ने लीग में भारी निवेश किया। फाइनल में शेन वॉर्न की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को हराकर पहला खिताब जीता। एक कमजोर मानी जा रही टीम का चैंपियन बनना आईपीएल की प्रतिस्पर्धात्मकता का पहला बड़ा उदाहरण था।

नीलामी का अनोखा मॉडल

आईपीएल की सबसे खास पहचान उसकी खिलाड़ी नीलामी है। हर टीम को सीमित बजट दिया जाता है और उसी के भीतर खिलाड़ियों को खरीदना होता है। हर तीन साल में होने वाली मेगा नीलामी के कारण टीमों को अपने अधिकांश खिलाड़ियों को रिलीज करना पड़ता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को संतुलित बनाए रखना है, ताकि कुछ चुनिंदा टीमें हमेशा मजबूत न बनी रहें।

दुनिया की सबसे मूल्यवान क्रिकेट लीग

वर्ष 2016 में आईपीएल की ब्रांड वैल्यू लगभग 4.2 अरब डॉलर आंकी गई थी। कुछ ही वर्षों में यह तेजी से बढ़ती गई। 2022 तक लीग का मूल्यांकन 11 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया। इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान क्रिकेट लीग और खेल उद्योग की सबसे सफल संपत्तियों में से एक माना जाने लगा।

महिला क्रिकेट तक पहुंचा आईपीएल मॉडल

आईपीएल की सफलता ने महिला क्रिकेट के लिए भी नया रास्ता खोला। 2022 में  महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) की घोषणा की गई और 2023 में इसका पहला सीजन खेला गया। महिला क्रिकेट में निवेश और व्यावसायिक अवसरों के लिहाज से यह एक ऐतिहासिक कदम माना गया।

19 सीजन बाद आईपीएल कहां खड़ा है?

2008 में शुरू हुई लीग 2026 तक 19 सीजन पूरे कर चुकी है। चेन्नई सुपर किंग्स और मुंबई इंडियंस पांच-पांच खिताबों के साथ सबसे सफल टीमें हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स तीन बार चैंपियन बनी है, जबकि राजस्थान रॉयल्स, डेक्कन चार्जर्स, सनराइजर्स हैदराबाद, गुजरात टाइटंस और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने एक-एक बार ट्रॉफी जीती है। 2025 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने पंजाब किंग्स को हराकर अपना पहला खिताब जीता।