अवैध आरा मिल मामला: फारेस्ट विभाग को भनक नहीं या फिर जानबूझकर नहीं की कार्रवाई, आपसी विवाद के बाद खुला मामला, फॉरेस्ट विभाग पर लग रहा प्रश्नचिन्ह, गुढियारी में मुख्य सड़क किनारे चला अवैध कारोबार का खेल, सीजी मिटान की पड़ताल में खुले कई राज, आप भी पढ़िए


बलराम यादव
पाटन। पाटन ब्लॉक के ग्राम गुढ़ियारी में फॉरेस्ट विभाग के नाक के नीचे 2 साल तक लगातार अवैध रूप से आराम मिल का संचालन किया जा रहा था जिस पर जानकारी होने के बाद फॉरेस्ट विभाग के अमले ने पहुंचकर कार्रवाई किया। लेकिन आखिर दो साल तक फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी क्या कर रहे थे ?, उनके सूचना तंत्र क्या कर रहे थे ?,  फॉरेस्ट विभाग का मैदानी अमला क्या कर रहे थे क्या कर रहे थे ?, स्थानीय जनप्रतिनिधि जो छोटी-छोटी बातों को लेकर सड़क जाम करने लग जाते हैं क्या कर रहे थे?,  क्या रहे है  वन विभाग के अधिकारी जो की एक छोटे  किसान अपने खेत में लगे एक पेड़ को काटते हैं तो वहां पर पूरा अमला तत्काल पहुंच जाता है?,  ऐसे में 2 साल अवैध आरा  मिल संचालन कई सारे सवाल खड़ा कर रहे हैं ?, सवाल का मुख्य बिंदु पर फॉरेस्ट विभाग ही है।  क्योंकि इन पर नियंत्रण की जिम्मेदारी फॉरेस्ट विभाग की है।  आखिर कहां फेल हो गई फॉरेस्ट विभाग का सूचना तंत्र या फिर जानबूझकर इस तरह से आरा मिल संचालक को अघोषित रूप से चलने की अनुमति दिया गया था। इन सब मामलों की जांच पर ही पूरी बातें स्पष्ट हो पाएगी।  हालांकि दुर्ग के फॉरेस्ट अधिकारी ने पूरे मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच करने का भी आश्वासन दिया है। वहीं जांच के बाद अगर दोषी पाए गए तो कार्रवाई का भी आश्वासन मिला है।  लेकिन सवाल अब भी वही हैं आखिर 2 साल कैसे अवैध रूप से होता रहा आरा मिल  संचालन।

आरा मिल स्थल पर टूटे हुए सीसी टीवी

आपसी विवाद के बाद खुला मामला
सीजी मितान  ने मौके पर जाकर इस पूरी घटना की पड़ताल शुरू की।  सुबह-सुबह जानकारी मिली कि वन विभाग के अमला ग्राम गुढ़ियारी में एक आरा मिल पर दबिश देने वाली है । उससे पहले सीजी मितान की टीम मौके पर पहुंच गई थी।  वहां पर कुछ विवाद के निशान भी दिख रहे थे। सीसीटीवी भी टूटा हुआ था ।साथ ही साथ कई गाड़ियां जब सीजी मितान की टीम पहुंची तो वहां से बाहर होते हुए भी दिखाई दिए।  स्थानीय लोगों के मुताबिक आरा मिल का संचालन कोई और कर रहा था और जिस स्थल पर आरा में लगी है उसका मालिक कोई और है। बताया जा रहा है कि इन दोनों में कुछ  बात को लेकर विवाद हुआ होगा इसके बाद आरा मिल जिसकी जमीन पर थी उन्होंने ही फॉरेस्ट विभाग को सूचना दी इसकी पुष्टि फॉरेस्ट विभाग के स्थानीय अधिकारियों ने मौके पर ही की । जब पूछा गया कि आखिर फॉरेस्ट विभाग को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई तो उल्टे ही और सवाल दाग दिए कि आप लोग भी तो पत्रकार हैं आपको भी 2 साल तक यह बातें कैसे पता नहीं चली। यह सवाल वाकई में फॉरेस्ट विभाग को कटघरे में खड़ा कर रहा है जवाब देने के बजाय उल्टा सवाल दागना फॉरेस्ट विभाग की मजबूरियों को दर्शा रहा है। अगर शिकायत नहीं होती तो क्या आरा मिल चलता रहता ।। इसे लेकर के भी कई प्रकार की चर्चा छिड़ी हुई है।  सीसीटीवी का टूटना आपसी विवाद या फिर वहां पर हुई झूमा झटका की खबर विवाद को दर्शाता है।  हालांकि सीजी मितान टीम के सामने किसी भी प्रकार का विवाद या फिर झूमा झटका की स्थिति नहीं बनी और आरा मिल संचालक जमीन मालिक वहां पर कार्रवाई के दौरान भी मौजूद रहे ।

आखिर अन्य आरा मिल में मेहरबानी क्यों
गुढ़ियारी में आरा मिल में दबीश के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि भी वहां पहुंच गए फॉरेस्ट के अधिकारियों को बताया कि यह तो एक छोटा सा नमूना है । गाड़ा डीह क्षेत्र में कई ऐसे आरा मिल है जिसकी जांच किया जाए तो परत खुलते जाएगी। अनियमितताओं का ढेर देखने को मिल जाएगा। लेकिन अधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों की बात को अनसुना कर दिया।  वहीं राजस्व विभाग से पहुंचे तहसीलदार ने कुछ जगह पर डंप किए हुए लकड़ी पर कार्रवाई किया।  लेकिन लकड़ी और आरा मिल संचालन के मामले में बड़े-बड़े दिग्गजों के स्थान पर जांच करने में भी विभाग का पसीना छूटने लगा है आखिर क्यों नहीं की गई जांच यह भी सवाल खड़े हैं।

कहा से मिली अवैध आरा मिल संचालन के लिए बिजली

अब बात करते हैं विद्युत विभाग की।  आरा मिल के संचालन के लिए बड़ी-बड़ी मोटर चलाने पड़ते हैं। इसके लिए विद्युत विभाग से अनुमति लेना भी जरूरी है। हालांकि जब पूछा गया तो अनुमति दिए जाने की बात कही गई । लेकिन मीटर आरा मिल से कुछ दूरी पर ही लगा है वहां से कनेक्शन लिया गया है। अब विद्युत विभाग भी लगातार निरीक्षण करते रहते हैं लेकिन इस आरा मिल पर आखिर बिजली की सप्लाई कैसे हुई।  अवैध रूप से संचालन में क्या विद्युत विभाग का मैदानी अमले का भी मिली भगत है इसकी भी जांच की जानी चाहिए। इस आरा मिल का बिजली बिल किसके नाम से आता था और किस टैरिफ के अनुसार आता था यह भी जांच कर विषय हो सकता है।