भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवता मानकर पूजन की परंपरा सनातन काल से प्रचलित है..टेसूलाल धुरंधर

भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवता मानकर पूजन की परंपरा सनातन काल से प्रचलित है..
टेसूलाल धुरंधर

अर्जुनी। प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी संस्कृति में गहरे सम्मान को दर्शाने वाला भाव है तभी तो भारत में वृक्षों की पूजा देव मानकर सनातन काल से प्रचलित है। 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्राम अर्जुनी के संघ शताब्दी उद्यान में आयोजित वृक्षारोपण के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत माता सेवा ट्रस्ट के संस्थापक टेसूलाल धुरंधर जी ने कहा कि पर्यावरण की समस्या अपने गांव या अपने देश का नहीं अपितु वैश्विक स्तर पर चिंता और चिंतन का विषय बना हुआ है । हवा, पानी, भूमि दिन प्रतिदिन तीव्र गति से प्रदूषित हो रहे हैं परिणामतः समस्त जीव सृष्टि असंतुलन का शिकार बन रहे हैं । सत्य तो यह है कि इस संकट के लिए मनुष्य ही उत्तरदायी है । भारत माता सेवा ट्रस्ट पिछले वर्ष पौधारोपण किए थे स्वयंसेवकों के कड़ी मेहनत से इस भीषण गर्मी में भी नियमित रूप से पेड़ों में पानी देने का काम हो रहा है जिससे फलदार और छायादार पेड़ों का विकास तेज गति से हो रहा है, निश्चित रूप से हमें जीवनदायनी शुद्ध हवा मिलने वाला है। प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को हमें समझना होगा । छोटी आयु में ही हमारे पूर्वजों ने पर्यावरण का महत्व समझाते हुए वृक्षारोपण जल संवर्धन तथा ऊर्जा का दुरुपयोग टालने के वृत्ति के बारे में जागरूक किया करते थे । उन्होंने आग्रह किया कि हम घर में फल आदि खाते हैं उसका बीज इकट्ठा कर लीजिए और उसे निकटस्थ जंगल में ले जाकर उचित स्थान पर छोड़ दीजिए वे स्वयं स्वस्फूर्त बरसात आते ही उग जाएंगे या उसे हमें दे दीजिए हम उसे जंगल में छोड़ देंगे इस प्रकार उस बीज से अनेक वृक्ष तैयार हो जाएंगे। इस अवसर पर भारत माता सेवा ट्रस्ट के स्वयंसेवकों द्वारा पेड़ों की पूजा की गई है उन्हें रक्षा सूत्र बांधा गया और संकल्प लिया गया कि पर्यावरण की समस्या केवल जानकारी लेने मात्र से हल नहीं होगा इसकी रक्षा हेतु हमें अपने चिंतन और व्यवहार में परिवर्तन लाने के प्रति दृढ़ संकल्पित रहेंगे। इस कार्यक्रम के अवसर पर श्री नीरज परगनिहा, तुलाराम वर्मा, डोमन लाल वर्मा, डमरूधर वर्मा,सुनीता वर्मा, लक्ष्मीकांत वर्मा,चित्ररेखा साहू,रवि वर्मा, प्रमोद सांखला,सुखराम ध्रुव,विष्णु साहू,चिंतामणि साहू, मोहित रजक,सालिकराम वर्मा, गंगाप्रसाद यदू,जावेंद्र सोनी , मेघनाथ वर्मा, पुरेद्र वर्मा,सालिक राम वर्मा,राधेश्याम साहू, हरिशंकर यदू,मुखित साहू ,पूरनलाल वर्मा,श्रवण निषाद आदि उपस्थित थे।