मुरूम उत्खनन के नाम पर तालाब बना ‘मौत का कुआं’, देव तालाब में गहरे गड्ढों से बढ़ा हादसे का खतरा, जामगांव एम का मामला

पाटन। ग्राम पंचायत जामगांव एम स्थित देव तालाब में मुरूम उत्खनन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।  तालाब के गहरीकरण के नाम पर किनारों को अत्यधिक गहरा खोद दिया गया है, जिससे तालाब अब “मौत का कुआं” बन गया है। उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति या पशु अनजाने में तालाब में गिर जाए तो उसका बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा।

ग्रामीणों के अनुसार तालाब के गहरीकरण के लिए लीज दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन वास्तविकता में भारी मशीनों से बड़े पैमाने पर मुरूम का उत्खनन किया गया। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी खनन कार्य के दौरान उचित निगरानी नहीं रखी, जिसके चलते तालाब की संरचना पूरी तरह बदल गई।

इस मामले में ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि खनन के लिए लीज स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भेजा गया था। वहीं, मौके पर खनन कार्य में लगे लोगों ने दावा किया कि उन्हें खनिज विभाग से लीज की अनुमति प्राप्त है। सूत्रों के माने तो कई हाइवा मुरूम बिना रॉयल्टी पर्ची के ही बाहर भेजे गए, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन कार्य में चैन मशीन (अर्थमूवर) का उपयोग किया गया, जबकि ऐसे कार्यों के लिए विभागीय नियमों का पालन किया जाना चाहिए। खनिज अधिनियम की अनदेखी कर नियमों को दरकिनार किए जाने की भी शिकायत सामने आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि खनन से निकला मुरूम आखिर कहां उपयोग किया गया और किसे बेचा गया, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार मुरूम को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचे जाने की भी चर्चा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए खनिज विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर जांच कर सकती है। यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।