डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के बीच असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। आस्था, आव्रजन नीति और वीज़ा से जुड़े मुद्दों को लेकर भारतीय समुदाय खुलकर विरोध जता रहा है। विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी नाराजगी सामने आ रही है।
अमेरिका में बड़ी संख्या में बसे भारतीयों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों से उनके धार्मिक, सामाजिक और पेशेवर जीवन पर असर पड़ा है। कई भारतीय प्रवासियों ने आरोप लगाया है कि सरकार की सख्त आव्रजन नीतियों से उनकी नौकरियों और भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।
भारत–पाक सीजफायर: ट्रंप ने भारतीयों की ‘रिकी गिल’ को सम्मानित किया
भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक रिकी गिल को भारत–पाक संघर्ष के दौरान शांति प्रयासों में भूमिका निभाने के लिए ट्रंप प्रशासन ने सम्मानित किया। व्हाइट हाउस में हुए कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि भारतीय समुदाय अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
रिकी गिल ने कहा कि भारतीय प्रवासी शांति, लोकतंत्र और आपसी सहयोग में विश्वास रखते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारतीय समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
ईरान–हमास नहीं मानते, उन पर गाज गिरेगी: ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और हमास को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे अमेरिकी हितों के खिलाफ कदम उठाते हैं तो उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य पूर्व में स्थिरता बनाए रखने के लिए सख्त फैसले जरूरी हैं। ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
नेतन्याहू पर पहली बार दबाव, अमेरिका के ईरान हमले पर बहस
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर पहली बार अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित हमले को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। कई देशों ने संयम बरतने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा।
ट्रंप: युद्ध खत्म करो, 24 घंटे में सेना हटाने का अल्टीमेटम
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध को तुरंत खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने 24 घंटे के भीतर सेना हटाने का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं, जबकि समर्थकों ने इसे मजबूत नेतृत्व का संकेत बताया है।
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