पाटन। पाटन ब्लॉक के कुछ शासकीय उचित मूल्य दुकानों में चावल में कीड़े मिलने की शिकायतों के बाद सीजी मितान ने मामले की जमीनी पड़ताल की। जांच के दौरान यह जानने का प्रयास किया गया कि आखिर चावल में कीड़े लगने के पीछे जिम्मेदार कौन है—नान का गोदाम, भंडारण व्यवस्था या फिर निगरानी तंत्र की लापरवाही।

पड़ताल के दौरान नान के गोदाम से लेकर संबंधित राशन दुकानों तक स्थिति का निरीक्षण किया गया। नान गोदाम में कर्मचारियों द्वारा नियमित साफ-सफाई के साथ चावल को सुरक्षित रखने के लिए किटोपचार (पेस्ट कंट्रोल) किया जाता पाया गया। गोदाम में कीड़े न लगें और उनके अंडे विकसित न हो सकें, इसके लिए विशेष दवाओं और पाउडर का छिड़काव भी किया जा रहा था।
वहीं दूसरी ओर, जिन राशन दुकानों में चावल में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आई, वहां का नजारा कुछ अलग दिखाई दिया। कई दुकानों में जिस कमरे में चावल का भंडारण किया गया था, वहां पर्याप्त साफ-सफाई का अभाव नजर आया। भवनों में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था तथा फर्श से लेकर दीवारों तक नमी दिखाई दी। विशेषज्ञों के अनुसार नमी और बंद वातावरण खाद्यान्न में कीड़े लगने की प्रमुख वजहों में से एक है।
पड़ताल में यह भी सामने आया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार तीन माह का चावल एक साथ राशन दुकानों में भेजा गया था। इससे दुकानों में सामान्य से अधिक मात्रा में स्टॉक जमा हो गया। कई स्थानों पर वितरण में देरी होने के कारण चावल लंबे समय तक भंडारित रहा, जिससे कीड़े लगने की समस्या उत्पन्न हुई।
पाटन ब्लॉक के सेलूद, सोरम और चीचा की शासकीय उचित मूल्य दुकानों में ही चावल में कीड़े मिलने की शिकायतें सामने आई हैं, जबकि अन्य अधिकांश राशन दुकानों में चावल की गुणवत्ता सामान्य पाई गई।
खाद्य विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल
मामले में खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। राशन दुकानों में खाद्यान्न और अन्य राशन सामग्री के भंडारण से लेकर वितरण व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य विभाग की होती है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को समय-समय पर उचित मूल्य दुकानों का निरीक्षण करना होता है।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कई दुकानों का निरीक्षण केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहा। यदि अधिकारी नियमित रूप से मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन करते, तो भंडारण कक्षों की वास्तविक स्थिति, नमी, साफ-सफाई की कमी और अन्य खामियों की जानकारी पहले ही मिल सकती थी तथा समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते थे।
भंडारण और वितरण में लापरवाही बनी वजह
सीजी मितान की पड़ताल में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि जहां भंडारण कक्ष साफ-सुथरे हैं, पर्याप्त जगह और वेंटिलेशन उपलब्ध है तथा समय पर वितरण किया गया, वहां चावल सुरक्षित मिला। वहीं तीन माह का स्टॉक एक साथ रखने, उचित भंडारण व्यवस्था नहीं होने और समय पर वितरण नहीं किए जाने के कारण कुछ दुकानों में चावल में कीड़े लगने की स्थिति बनी।
अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग भंडारण व्यवस्था की नियमित निगरानी करे, राशन दुकानों का वास्तविक निरीक्षण सुनिश्चित करे और हितग्राहियों तक गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए।






