पाटन।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित समाजशास्त्र विभाग के सह-आयोजन में किया गया | इस आयोजन का उद्देश्य महिला सशक्तिकरण और नारी चेतना के विभिन्न आयामों से छात्र-छात्राओं को परिचित कराना, तथा उनमें नई चेतना के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और आर्थिक सुदृढ़ता के प्रयासों को और तेज करने हेतु जागृत करना था | इसी कड़ी में वक्ताओं डॉ गौरव शर्मा (विभाग-अध्यक्ष वाणिज्य) ने इंफोसिस के फाउंडर नारायणमूर्ति का उदाहरण प्रस्तुत किया, तथा उनकी पत्नी सुधामूर्ति का उदाहरण छात्रों के समक्ष रखा | डॉ आर के वर्मा (विभाग-अध्यक्ष गणित) ने छत्तीसगढ़ में टोनीही प्रताड़ना अधिनियम लागू करने, मातृ तथा शिशु मृत्यु-दर पर नियन्त्रण, तथा संविधान के 73 वें और 74 वें संशोधन विधेयक के माध्यम से स्थानीय निकायों में महिला नेतृत्व के माध्यम से नारी सशक्तिकरण, जैसे कई प्रयासों का विशेष उल्लेख किया | डॉ पुष्पा मिंज (संचालक एवं सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र) ने भारतीय संस्कृति को बचाते हुए महिलाओं को प्रगति करने का आह्वान किया | इसके पश्चात प्राचार्य डॉ शोभा श्रीवास्तव ने स्वयं महिलाओं को ही समाज और परिवार की धुरी कहा | आपने बताया कि महिलाओं को बिना अपना सामाजिक-दायित्व निभाए केवल आर्थिक सफलता की ओर अकेले कदम बढ़ाने का कोई अर्थ नहीं है | क्योंकि इससे सामाजिक बिखराव और पतन तय है | एम एस डब्लू के छात्र उमाशंकर निर्मलकर, वाणिज्य के छात्र तोशी देवान्गँन आदि कुछ छात्राओं ने भी संबोधित किया | इस अवसर पर महाविद्यालय के गेस्ट प्राध्यापक प्रिया चंद्राकर, लोकेश्वरी, अंजली सिंह, राहुल चौधरी, अभिषेक वर्मा तथा एम एस डब्लू, एम ए, (समाजशास्त्र), एमएससी (गणित), एम कॉम (वाणिज्य) के छात्र उपस्थित थे |







