पंडरिया-नगर के मध्य में स्वयंभू श्री महामाया देवी की दिव्य भव्य 400 वर्ष प्राचीन मूर्ति विराजित हैं, जो 484 गांव के पुराने पंडरिया जमींदारी के आस्था का एक मात्र केंद्र है ! वर्तमान में इस धार्मिक स्थल के सर्वराकार नाबालिक राजा भिवान राज सिंह हैं। संरक्षक के रूप में राजा के चाचा अमर राज सिंह देखरेख करते आ रहे हैं, वर्ष में दो बार चैत और क्वांर महा में नवरात्रि महोत्सव धूम धाम से मनाया जाता हैं! दोनों नवरात्रि पर्व में राजपरिवार के साथ सैकड़ों देवी भक्तों की मनोकामना ज्योति और जेवारा स्थापित किया जाता हैं! इस शारदीय नवरात्र में 1301/ज्योति कलश स्थापित किया गया है।प्रतिदिन मंदिर प्रांगण में माता सेवा का कार्यक्रम आयोजित किया जाता हैं। पंचमी/महा अष्टमी को विशेष राजसी देवी श्रृंगार किया जाता हैं !30सितम्बर को महा अष्टमी पूजा हवन होगा वहीं 02 अक्टूबर को दशहरा के दिन ज्योति विसर्जन शोभायात्रा, नन्हें राजा की सवारी के साथ बुराई के प्रतीक रावण पुतले का दहन कुशाल बंद तालाब ,वार्ड क्रमांक एक में किया जाएगा।







