मिथुन मूर्ति कला में जे आर भगत को मिली पीएचडी की उपाधि…दक्षिण कौशल की “मिथुन प्रतिमाओं” पर किया शोध

राजू वर्मा सीजी मितान न्यूज़

रायपुर।ज्ञान प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती है, इस कहावत को चरितार्थ जे. आर. भगत ने किया । कलिंगा विश्वविद्यालय नया रायपुर के अंतर्गत इतिहास विभाग में छत्तीसगढ़ के प्राचीन स्थापत्य एवं मूर्ति शिल्प के विशिष्ट क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की ‘मिथुन प्रतिमाओं का अनुशीलन’ शीर्षक के अंतर्गत शोधार्थी जे. आर.भगत के द्वारा पीएचडी कार्य संपन्न किया गया है । उन्हें इस शोध प्रबंध के लिए पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है ।

छत्तीसगढ़ में मूर्ति क्षेत्र में मिथुन प्रतिमाओं का कलात्मक अंकन मिलता है । भारतीय संस्कृति में पुरुषार्थ के अंतर्गत काम को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। इस गंभीर विषय पर जे आर भगत ने गहन अध्ययन एवं शोध कर दक्षिण कौशल की मिथुन प्रतिमाओं पर एक महत्वपूर्ण कार्य किया है ।

जे आर भगत छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिले के ग्राम जामटोली, विकासखंड दुलदुला जिला जशपुर के मूल निवासी हैं तथा उराव जनजातीय समुदाय से संबंधित है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गृह ग्राम जामटोली से प्रारंभ कर उच्च शिक्षा पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के इतिहास विभाग से एम. ए. एवं एमफिल की उपाधि वर्ष 1987 में अर्जित की।
वर्ष 1990 में मध्य प्रदेश शासन, पुरातत्व अभिलेखाकर एवं संग्रहालय में संग्रह अध्यक्ष के पद पर ओरछा, जिला- टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश) पर नियुक्त हुए। वर्ष 1992 में जिला पुरातत्व संग्रहालय जगदलपुर में संग्रहाध्यक्ष के पद पर पदस्थ रहकर जगदलपुर संग्रहालय के उन्नयन तथा भवन अधिग्रहण पद पर तत्पश्चात वर्ष 2025 में संयुक्त संचालक के पद पर पदोन्नत हुए ।

इसी अवधि में शासकीय सेवा में रहते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ क्षेत्र के स्थापत्य एवं मूर्ति कला के क्षेत्र में मिथुन प्रतिमा जैसे जटिल विषयों को अपने पीएचडी उपाधि के लिए विषय के रूप में चयन कर प्रथम प्रयास में ही सफलता अर्जित की है ।
जशपुर जनजाति वर्ग के एक सामान्य कृषक परिवार में जन्म लेकर अनेक प्रकार की कठिनाइयों से जूझते हुए श्री भगत ने पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में राजपत्रित अधिकारी के पद के साथ सशोध अन्वेषण क्षेत्र में पीएचडी (डॉक्टरेट )उपाधि अर्जित कर अपने ग्राम , जाति, समाज का नाम उज्ज्वल किया है । भगत पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में राजपत्रित अधिकारी के रूप में पदस्थ होने वाले जशपुर अंचल के प्रथम व्यक्ति हैं । अपने शासकीय सेवा में श्री भगत ने बस्तर संभाग, रायपुर संभाग, सरगुजा संभाग में स्मारकों के संरक्षण अनुरक्षण ,उत्खनन तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वेक्षण जैसे कार्य संपन्न किए हैं। वर्ष 2012 से 2015 तक दुर्ग जिले पाटन ब्लॉक के तरीघाट  ग्राम के प्राचीन टीलों का उत्खनन कार्य जे आर भगत के निदेशन में संपन्न हुआ तथा अंग्रेजी भाषा में उत्खनन रिपोर्ट प्रकाशित करवाई गई। जे आर भगत स्वत: जनजाति समुदाय के हैं तथा उन्हें लगभग सभी क्षेत्रीय बोली -भाषा का ज्ञान है l वर्तमान में श्री भगत संचालक पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय में संयुक्त संचालक के पद पर कार्यरत हैं। शैल चित्रों के अन्वेषण ,अध्ययन के क्षेत्र में भी  विशिष्ट योगदान है एवं वन्य जीव, जंतु ,पक्षी, तितली एवं पर्यावरण के प्रति आपकी गहरी अभिरुचि है। इनकी फोटोग्राफी के साथ इनके संरक्षण की दिशा में भी कई संस्थानों से जुड़े हुए हैं ।