टाटा पावर को बिजली वितरण लाइसेंस देने का विरोध, जनता यूनियन ने आयोग से प्रक्रिया रद्द करने की मांग


दुर्ग। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपे जाने के प्रस्ताव के खिलाफ छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है। टाटा पावर द्वारा रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्रों में विद्युत वितरण का कार्य करने के लिए लाइसेंस प्राप्त करने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बाद यूनियन ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस मामले में 1 अक्टूबर को जनसुनवाई प्रस्तावित है।
यूनियन के प्रांतीय उपाध्यक्ष यतीश वर्मा ने कहा कि बिजली आम जनता, किसानों, मजदूरों, व्यापारियों और उद्योगों की मूलभूत आवश्यकता है। इसे केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था को मजबूत करना ही जनहित में बेहतर विकल्प है।
यूनियन ने आशंका जताई है कि निजी कंपनी के आने से भविष्य में बिजली वितरण की लागत और अन्य शुल्कों का भार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनियों की भूमिका और कार्यक्षेत्र सीमित होने की संभावना भी जताई गई है।
कर्मचारियों के हितों को लेकर भी चिंता जताई गई है। यूनियन का कहना है कि निजी वितरण व्यवस्था लागू होने पर कर्मचारियों एवं अधिकारियों के रोजगार, सेवा शर्तों, स्थानांतरण, पदोन्नति, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की सेवा-सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
ग्रामीण और कम राजस्व वाले क्षेत्रों को लेकर भी यूनियन ने सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि निजी कंपनियां आर्थिक रूप से लाभकारी क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकती हैं, जिससे ग्रामीण, गरीब और कम राजस्व वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति एवं आवश्यक सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
जनता यूनियन ने कहा कि यदि मौजूदा बिजली वितरण व्यवस्था में तकनीकी, प्रशासनिक या वित्तीय कमियां हैं तो उनका समाधान सरकारी बिजली कंपनियों को पर्याप्त वित्तीय संसाधन, आधुनिक तकनीक, मानव संसाधन और बेहतर प्रबंधन उपलब्ध कराकर किया जाना चाहिए।
यूनियन ने आयोग से टाटा पावर के प्रस्ताव का जनहित एवं उपभोक्ता हित की दृष्टि से पुनः परीक्षण करने, निजी कंपनी को विद्युत वितरण लाइसेंस देने की प्रक्रिया निरस्त करने तथा कर्मचारियों के हितों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराने की मांग की है।
साथ ही 1 अक्टूबर की प्रस्तावित जनसुनवाई में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत कर्मचारी जनता यूनियन को अपनी आपत्तियां, सुझाव और पक्ष रखने का पूर्ण अवसर देने तथा संगठन की लिखित आपत्तियों को आयोग की कार्यवाही एवं अंतिम निर्णय में शामिल करने की मांग की गई है।