रुचि वर्मा
सीजी मितान न्यूज़
कमरछठ छत्तीसगढ़ के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे हलछठ या हलषष्ठी भी कहा जाता है। इस वर्ष कमरछठ 14 अगस्त गुरुवार को मनाया जाएगा।इस व्रत में माताएं निर्जला रहकर शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और सगरी (मिट्टी का कुआं) बनाकर सारी रस्में निभाई जाती हैं।
क्या है मान्यता
इस त्योहार को मनाने के पीछे की कहानी है कि जब कंस ने देवकी के 7 बच्चों को मार दिया तब देवकी ने हलषष्ठी माता का व्रत रखा और श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ. मान्यता है कि इस वक्त से कमरछठ मनाने का चलन शुरू हुआ.
व्रत का महत्व
कमरछठ व्रत संतान की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं छह तरह की भाजियां, पसहर चावल, काशी के फूल, महुआ के पत्ते, धान की लाई, भैंस का दूध, दही सहित कई छोटी-बड़ी पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पित कर संतान के दीर्घायु जीवन की कामना करती हैं।
व्रत की प्रक्रिया
व्रत की प्रक्रिया में माताएं सुबह से निर्जला रहती हैं और शाम को डूबते सूर्य को अर्घ देने के बाद अपना व्रत खोलती हैं। इस अवसर पर कमरछठ की कहानी सुनने का भी विशेष महत्व है।
अन्य रस्में
इस दिन, महिलाएं अपने बच्चों के पीठ पर पीली पोती लगाती हैं और उनके दीर्घायु की कामना करती हैं।
सांस्कृतिक महत्व
कमरछठ छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। इस व्रत के माध्यम से माताएं अपने संतान के लिए अपनी ममता और प्रेम को प्रकट करती हैं और भगवान शिव से उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।







