
पाटन। प्रदेश के कोटवारों ने अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित किया है। कोटवार संघ का कहना है कि वे लंबे समय से प्रशासन और आम जनता की सेवा करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है। इससे प्रदेशभर के कोटवार और उनके परिवार आर्थिक व सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। आज जनपद पंचायत पाटन के सामने कोटवार संघ द्वारा प्रदेश संगठन के आह्वान पर एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया। इसमें मुख्य रूप से कोटवार संघ के दुर्ग संभाग अध्यक्ष भुनेश्वर चोपड़ा मौजूद रहे। वही कोटवार संघ के मांग का समर्थन करने दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर भी धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने अपने संबोधन में राज्य सरकार को जमकर कोसते हुए कोटवार संघ की मांगो को पूरा करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि कोटवारों को इस लड़ाई में कांग्रेस उनके साथ है। संघ द्वारा मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार पाटन पवन ठाकुर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि अंग्रेजों के शासनकाल से कोटवार राजस्व विभाग के सहयोगी के रूप में कार्य करते आ रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें नाममात्र का पारिश्रमिक दिया जा रहा है। सेवा अवधि पूरी होने, मृत्यु अथवा सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी सहित अन्य शासकीय सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे वृद्धावस्था में उन्हें कठिन जीवन बिताना पड़ता है। कोटवार संघ ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का भी हवाला दिया है, जिसमें विभिन्न विभागों में लंबे समय से कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की बात कही गई है। इसी आधार पर संघ ने कोटवारों को नियमित कर राजस्व विभाग में संविलियन करने की मांग की है। संघ ने वर्तमान पारिश्रमिक को महंगाई के अनुरूप बढ़ाने की भी मांग रखी है। ज्ञापन के अनुसार वर्तमान में सेवा भूमि के आधार पर 3 हजार से 6 हजार रुपये तक मासिक पारिश्रमिक दिया जाता है, जिसे बढ़ाकर अलग-अलग श्रेणियों में 8 हजार से 15 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की गई है। कोटवार संघ ने नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्रों में कोटवारों की नियुक्ति पर लगे प्रतिबंध को तत्काल हटाने की भी मांग करते हुए शासन से सभी लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। इस अवसर पर कोटवार एसोशिएशन आफ छत्तीसगढ़ के संरक्षक हेमंत कुलदीप, अध्यक्ष बीरबल चौहान, उपाध्यक्ष ऐश्वर्य कुमार, परमेश्वर, दिल्लू, मोहन लाल, चोवा राम, दिलेश्वर प्रसाद, उमा मानिकपुरी, गोपाल चंदेल, ओम प्रकाश, मुन्ना लाल, इतवारी राम, हिम्मत दास, नीलकंठ, शिव प्रसाद, मोहन लाल, सुशील दास, सहित अन्य मौजूद रहे







