पण्डरिया-नगर के लोरमी रोड स्थित दिनेश सिंह ठाकुर व गोलू ठाकुर के निवास स्थान पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा 25 अक्टूबर 2025 से 1 नवंबर 2025 तक के अंतर्गत बुधवार को पंचम दिवस की कथा बड़े ही भक्ति भाव और उल्लास के साथ संपन्न हुई। कथा स्थल पर भक्तों की अपार भीड़ रही और वातावरण “हरे कृष्ण, राधे राधे” के मधुर जयघोषों से गूंज उठा।कथावाचक आचार्य अमर कृष्ण महाराज (बिलासपुर) ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोपाष्टमी पर्व तथा गोवर्धन पूजा का भावपूर्ण वर्णन किया।
महाराज श्री ने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएँ केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक संदेशों से युक्त हैं। उन्होंने बताया कि कैसे नन्हे कान्हा ने माखन चुराया, गोपियों से हँसी-ठिठोली की, यशोदा मैया के डाँटने पर मुस्कुराते हुए सारा संसार मोहित कर दिया।
उन्होंने पूतना वध, शकटासुर का संहार, त्रिणावर्त का दमन जैसे प्रसंगों के माध्यम से यह बताया कि बाल्य अवस्था में भी श्रीकृष्ण ने अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना का कार्य किया।आचार्य श्री ने गोपाष्टमी पर्व के माध्यम से गौ–सेवा और गौ–संरक्षण पर बल दिया और यह भी बताये कि आज के दिन से ही श्री कृष्ण गौ चारण प्रारंभ किए थे। उन्होंने कहा कि गौ हमारी संस्कृति और आस्था की आधारशिला है, अतः उसकी रक्षा प्रत्येक सनातनी का कर्तव्य है।
साथ ही, पंडित जी ने वृक्षारोपण के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि “एक वृक्ष सौ पुत्रों के समान है”, इसलिए हर व्यक्ति को प्रकृति संरक्षण में योगदान देना चाहिए। यह भी याद दिलाया कि एक पेड़ मां के नाम का सुंदर मुहिम चल रहा है। सबको मिलकर इसे पूरा करना है। वृंदावन के पवित्र भूमि की भी अपार महिमा बताई ,छोटे-छोटे दृष्टांतों से उदाहरणभी दिये। पंडित जी ने बताया कि श्री कृष्ण वहां 11 वर्ष रहे और तब तक पादश्राण नहीं पहने थे । इसलिए वहां की भूमि बहुत पवित्र है। यदि वहां की धूल भी हम पर पड़ जाए तो हम पवित्र हो जाएंगे।
कथा के अंत में ग्वाल बाल कृष्ण की झांकी,भव्य आरती, भजन व प्रसाद वितरण हुआ। श्रद्धालु भक्तों ने “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों के साथ नृत्य किया और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।







