महर्षि अरबिन्दो का “विशाल भारत” विषय पर कार्यशाला का आयोजन


दुर्ग।  शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय, दुर्ग के राजनीति विज्ञान विभाग एवं राष्ट्रीय सुरक्षा जारण मंच द्वारा “महर्षि अरविंदो का विशाल भारत” विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के रविंद्र नाथ टैगोर हॉल में अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा – अध्यक्ष, बाल संरक्षण आयोग, छत्तीसगढ़ शासन (राज्य मंत्री स्तर) थीं, एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. एन.पी. दीक्षित (पूर्व कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग) तथा श्री वी एन पाण्डेय – सदस्य राष्ट्रीय कार्यकारिणी राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच थे। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं राज्य गीत के साथ किया गया, तत्पश्चात् प्राचार्य द्वारा अतिथियों का स्वागत शाल, श्रीफल पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया एवं उनका परिचय एवं सम्मान सम्पन्न हुआ। स्वागत भाषण मे प्र. प्राचार्य डा.एस के झा ने कहा कि अटलाण्टिक से प्रशांत महासागर तक फैले हुए भारतीय तकनीकि व प्रबंध पेशेवरो एवं डायस्पोरा ने भारत को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया है, आज की व्याख्यान संगोष्ठी “विशाल भारत” की संकल्पना से भारत की सांस्कृतिक एकता एवं आध्यात्मिकता का महत्व स्थापित करने मे सहायक होगी। कार्यक्रम की रूप रेखा एवं विषय प्रवर्तन करते हुए कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष डा. शकील हुसैन ने बताया कि महर्षि अरबिन्दो के विशाल भारत की संकल्पना वस्तुतः भारत की आध्यत्मिक शक्ति और सांस्कृतिक प्रभाव के पुनर्जागरण की संकल्पना है, इसीलिए भारत विश्वगुरू रहा है। उन्होने बताया कि वर्तमान वैश्विक समस्याओं और हिंसा का समाधान केवल भारत की आध्यात्मिकता सांस्कृतिक विशालता मे है। विशिष्ठ अतिथि डॉ. एन.पी. दीक्षित ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि श्री अरविंदो का “विशाल भारत” केवल भौगोलिक सीमाओं का विचार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और नैतिक एकता का सजीव दर्शन है। उन्होंने भारत के पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के माध्यम से “वृहत्तर भारत” की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और विश्व में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ. वर्णिका शर्मा ने अत्यन्त प्रभावपूर्ण व्याख्यान दिया। अत्यंत सरल एवं प्रभावशाली भाषा का प्रयोग करते हुए उन्होने श्री अरविंदो के विचारों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल परंपराओं का संकलन नहीं, बल्कि यह जीवन की एक सतत प्रवाहमय धारा है, जो मानवता, वसुधैव कुटुम्बकम एवं आध्यात्मिक एकता के मूल्यों पर आधारित है। यही मूल्य विश्व को शांति समृद्धि और सह अस्तित्व की दिशा दे सकतें है। उन्होंने श्री अरविंदो के ” विशाल भारत की संकल्पना एवं आध्यात्मिक राष्ट्रवाद” को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक बताया और विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति के संरक्षण, प्रसार तथा उसको आत्मसात करने का आह्वाहन किया। व्याख्यान मे अन्य महाविद्यालयों से भी विद्यार्थी, एन एस एस के कार्यक्रम अधिकारी और स्वयंसेवक शामिल थे, जिससे महर्षि अरबिन्दो के “विशाल भारत” की संकल्पना का विचार सम्भाग के विभिन्न महाविद्यालयों तक पहुंचा। राजनीति विज्ञान विभाग ने “राष्ट्रीय सुरक्षा” एवं “राष्ट्रीय एकता” विषय पर पोस्टर प्रतियोगिता तथा भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया था, जिसके विजेताओं को मुख्य अतिथि डा. वर्णिका शर्मा द्वारा पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम के अंत में राजनीतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ. शकील हुसैन ने सभी अतिथियों, प्राचार्य, गैर शैक्षणिक स्टाफ, विभागीय सदस्यों, विद्यार्थियों, मीडिया कर्मियों, एवं अन्य महाविद्यालयीन सहयोगियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकगण छात्र-छात्राएँ, तथा एन.एस.एस. के स्वयंसेवक उपस्थित रहे।