महुआ के फूल गिरने लगे।बैगा आदिवासियों के आर्थिक स्त्रोत है महुआ


पंडरिया।ब्लाक में स्थित मैकल श्रेणी के वनांचल गांवों में महुआ के फूल लग चुके हैं।जो अब पेड़ों से टपकने लगे हैं।क्षेत्र के बैगा आदिवासी सुबह महुआ पेड़ के नीचे महुआ फूल बीनते नजर आने लगे हैं।यह कार्य करीब डेढ़ माह तक चलेगा।नगर से करीब पांच किलोमीटर दूर रहमान कापा के पास लगे जंगल से लेकर कोदवागोड़ान,तेलियापानी,पंडरीपानी,कांदावानी,बिरहुलडीह,तक महुआ का पेड़ लगे हुए हैं।जहां आदिवासी महुआ एकत्रित करते हैं।आदिवासी समाज के लोगों में महुआ का विशेष महत्व है।महुआ से बनी शराब का उपयोग बैगा आदिवासी समाज के लोग जन्म-मृत्यु सहित हर सामाजिक आयोजन में करते हैं।इस प्रकार यह इनके संस्कृति से जुड़ा हुआ है।

इसके अलावा महुआ के फूल लगने पर इनके द्वारा उत्साह के रूप में मनाया जाता है।इन दिनों पूरा वन क्षेत्र महुये की भीनी खुशबू से महक रही है।
आर्थिक स्त्रोत है महुआ-महुआ बैगा आदिवासियों का मुख्य आर्थिक स्त्रोत है।बैगा आदिवासी मार्च व अप्रैल में पूरे परिवार सहित महुआ बीनने का कार्य करते हैं।जिसे इकट्ठा कर इसे बाजार में बेचते हैं।साथ ही अपनी जरुरत पूरा करते हैं।महुआ फूल के बाद इसके फल गुल्ली इकट्ठा कर तेल निकालने का कार्य करते हैं।जिसका उपयोग खाने के लिए किया जाता है।
तीन स्तर में होती है खरीदी- ब्लाक अंतर्गत वन विभाग द्वारा तीन स्तर पर महुआ खरीदी केंद्र स्थापित है।जिसमे ग्राम स्तर प्रबंधन केंद्र जो हर गांव में होती है।दूसरा हाट-बाजार केंद्र जो वनांचल के हाट बाजार में महुआ खरीदी का कार्य करता है।इसकी संख्या ब्लाक में 6 है।

जो कोदवागोड़ान,कुई,नेऊर,कामठी,पोलमी सहित कई बाजारों में खरीदी का कार्य करती है।ब्लाक में एक वन – धन केंद्र है।जो कोदवागोड़ान में है।वन विभाग पंडरिया के एसडीओ जशवीर सिंह मरावी ने बताया कि शासन द्वारा महुआ खरीदी तीन स्तर पर की जाती है,तथा इस बात की निगरानी भी की जाती है कि इन्हें समर्थन मूल्य से कम दाम न मिले।शासन द्वारा महुआ का 32 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है।


बाजार में अधिक मूल्य-महुआ की कीमत बाजार में अधिक है।बैगा आदिवासी शासन द्वारा निर्धारित केंद्रों के बजाय बाजार में बेचना ज्यादा पसंद करते हैं।क्योंकि शासन द्वारा महुआ की कीमत 32 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित है।वहीं बाजार में महुये की कीमत 50 रुपये तक है।जिसके कारण बैगा आदिवासी बाजार में बेचना पसंद करते हैं।साथ ही शासन के पास महुआ बेचने से 15 से महीने दिनों तक पैसा नहीं मिलता है।जबकि व्यापारी के पास तत्काल पैसा मिल जाता है।कई जगह छोटे व्यापारियों द्वारा कम कीमत देकर शोषण भी किया जाता है।