राजू वर्मा सीजी मितान न्यूज़

धुड़मारास के युवा मानसिंह बघेल को निजी विश्वविद्यालय आइटीएम रायपुर ने डाक्टरेट की उपाधि प्रदान की है।बुधवार को विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह में उन्हें ये उपाधि दी गई।
बता दें कि मानसिंह ने जंगल के बीच बसे धुड़मारास गांव में नौकायन, बैंबू राफ्टिंग, होम स्टे और बस्तर की आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर से पर्यटकों को परिचित कराने की शुरुआत की थी। देखते ही देखते पर्यटन का यह प्रमुख केंद्र बन गया।
धुड़मारास जिला मुख्यालय जगदलपुर से लगभग 40 किमी दूर दरभा में है। यहां 40 परिवार रहते हैं। आज यह गांव किसी पहचान का मोहताज नहीं, क्योंकि यहां के युवाओं ने प्रकृति को पर्यटन से जोड़कर यहां के जनजातीय समुदाय को समृद्धि की राह दिखाई।
इस अवसर पर मानसिंह बघेल (मनिष)ने आईटीएम विश्वविद्यालय के 10 वे दीक्षांत समारोह में अपने उद्बोधन में पूरे हाल को गहराई से प्रेरित किया।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में जन्मे एक साधारण आदिवासी धुरवा बाहुल गाँव जहाँ पर चारों और पहाड़ों नदियों प्रकृति के बीच मे जो कभी भारत के नक्शे पर भी नहीं था उनका सफर किसी असाधारण से कम नहीं है उन्होंने कभी मुम्बई जैसे महानगर में एक कन्स्ट्रक्शन कंपनी में एक कुशल निर्माण मजदूर से सुपरवाइजर के रूप में काम किया था और उन्हें दुबई में एक आकर्षक करियर का प्रस्ताव मिल था लेकिन व्यक्तिगत सफलता कर पीछे भागने के बजाय उन्होंने त्याग का रास्ता चुना वे-अपनी जड़ों की और एक भूले बिसरे गांव की और लौट आए और उसे बदलने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया आज वहीं गांव धूड़मारास (धुरवा डेरा) यू एन डब्ल्यू टी ओ के सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव 2024 के रूप में गर्व से खड़ा है जिसे अपने पर्यवारण -पर्यटन और सतत विकास मॉडल के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है ।

उन्होंने क्या हासिल किया ??
अपने लोगों के लिए जनजातिय अधिकार और सरकारी मान्यता सुनिचित की जहां पर पहले स्कूल ,सड़कें, बिजली,स्वच्छ पेयजल, मोबाइल कनेक्टिविटी, नहीं वहां ये सुविधा उपलब्ध कराया गया धुरवा डेरा होम स्टे बाम्बू राफ्टिंग और कयाकिंग से ईको टूरिज्म उद्यम का निर्माण किया गया जिसमें धूड़मारास गांव के 40 परिवारों को रोजगार मिला एक सामुदायिक सवामित्व वाला उद्यम स्थापित किया गया जहाँ राजस्व को गांव में पुनः निवेश किया जाता है – युवाओं को आशा सम्मान और आजीविका प्रदान कर के उन्हें गलत प्रभाव से बचाया गया जो एक समय पर पलायन कर अन्य प्रदेशों में काम की तलाश में जाते थे एक भूले बिसरे नाम से लेकर विश्व पर्यटन मानचित्र तक उनकी कहानी से इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति का दृष्टिकोण पीढ़ियों को बदल सकता है।

डॉ. मानसिंह बघेल (मनीष)की यात्रा केवल बस्तर की कहानी नहीं है यह भारत की लचीलेपन त्याग और जमीनी स्तर के नेतृत्व की शक्ति की कहानी है।






