संस्कृति महिला ग्रुप के गरबा उत्सव में शामिल हुईं विधायक भावना बोहरा, महिलाओं के साथ किया गरबा

पंडरिया। नगर में संस्कृति और भक्ति का संगम देखने को मिला। पीएम श्री आत्मानंद स्कूल मैदान में संस्कृति महिला ग्रुप द्वारा आयोजित तीन दिवसीय रास गरबा उत्सव के दूसरे दिन बुधवार को पंडरिया विधायक भावना बोहरा शामिल हुईं।
इस अवसर पर विधायक बोहरा ने मातारानी के चरणों में छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उन्नति के लिए प्रार्थना की और महिलाओं व बच्चों के साथ गरबा कर उनका उत्साहवर्धन किया।


विधायक श्रीमती बोहरा ने कहा कि “गरबा केवल नृत्य नहीं, बल्कि मां दुर्गा की आराधना का एक अद्भुत रूप है, जिसमें ताल, लय और भक्ति एक साथ मिलकर हमारी समृद्ध भारतीय परंपरा और मातृशक्ति के प्रति समर्पण का प्रतीक बनती है। गरबा का आयोजन महिलाओं की आत्मनिर्भरता और साहस को भी प्रदर्शित करता है।”कार्यक्रम के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष मंजुला देवी कुर्रे, जनपद अध्यक्ष नंदिनी साहू, मंडल अध्यक्ष रविश ठाकुर, कल्याण सिंह ठाकुर, चंद्रकुमार सोनी, नवल किशोर पांडेय,उपाध्यक्ष सुमित तिवारी, हरीश जैन, गोलू ठाकुर, प्रभा देवांगन, मीनाक्षी ठाकुर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

छठवें वर्ष का भव्य आयोजन-
नगर की सांस्कृतिक चेतना और नारी शक्ति की पहचान बन चुका संस्कृति महिला ग्रुप का यह छठवां वर्ष का आयोजन है। भव्य गरबा उत्सव का शुभारंभ 15 अक्टूबर को हुआ जो 17 अक्टूबर तक अयोजित था। इस वर्ष गरबा में 200 से अधिक बच्चियां व महिलाएं शामिल हुईं, जो नगर का सबसे बड़ा महिला समूह है।
कार्यक्रम की विशेष झलकियां

  • महाकाल बाबा की अलौकिक और भव्य झांकी
  • पारंपरिक परिधानों में माता और महाकाल की आराधना
  • गरबा नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति में भक्ति का समावेश
  • ढोल-नगाड़ों की थाप पर महाकाल की भक्ति में झूमता नगर
    भव्य आयोजन का निर्देशन– गरबा का निर्देशन जिले के प्रसिद्ध प्रोफेशनल कोरियोग्राफर मुकेश सर एवं किनसुक सर द्वारा किया गया। उनके कुशल निर्देशन में सभी महिला सदस्यों ने पिछले 20 दिनों से गरबा नृत्य का अभ्यास किया था। कार्यक्रम में सभी महिला सदस्य पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर महाकाल और माता की आराधना करते हुए गरबा नृत्य करती नजर आईं।

महिलाओं द्वारा संचालन-
इस गरबा उत्सव की सबसे खास बात यह है कि मंच संचालन से लेकर प्रैक्टिस और व्यवस्थापन तक के सभी कार्य महिलाओं द्वारा ही किए जाते हैं। समिति में 30 से अधिक स्थायी महिला सदस्य हैं, जो समय-समय पर गरबा के अलावा अन्य सामाजिक कार्य भी करती हैं।