एक शिक्षक के भरोसे 70 से अधिक बच्चे, पहली से पांचवीं तक की पढ़ाई की जिम्मेदारी अकेले प्रधान पाठक पर

केशव साहू
ग्राम खंडा, विकासखंड एवं जिला दुर्ग (छत्तीसगढ़)। ग्राम खंडा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूल में पहली से पांचवीं तक की कक्षाओं में बालक-बालिकाओं की दर्ज संख्या 70 से अधिक है, लेकिन इन सभी बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी वर्तमान में एकमात्र शिक्षक एवं प्रधान पाठक निजामुद्दीन साबरी के भरोसे है।

एक ही शिक्षक द्वारा पहली से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक साथ संभालने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में स्वाभाविक रूप से कठिनाई होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि एक शिक्षक 70 से अधिक बच्चों के भविष्य को किस तरह संवार पाएगा?

एक ओर शासन द्वारा शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने और स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम खंडा के इस स्कूल की स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था नहीं होने से कहीं न कहीं बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका है।

बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ की जानकारी भी नहीं

स्कूल में बच्चों की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। बच्चों को गुड टच-बैड टच के संबंध में पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा स्कूल में POCSO बॉक्स भी उपलब्ध नहीं है, जबकि बच्चों की सुरक्षा और शिकायतों के लिए ऐसी व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

बुनियादी ज्ञान को लेकर भी चिंता

बताया जा रहा है कि कक्षा पांचवीं के कुछ बच्चों को अभी तक पहाड़े अच्छी तरह याद नहीं हैं। वहीं बच्चों से सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे जाने पर उन्हें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का नाम तक पता नहीं होने की बात सामने आई है। इससे बच्चों की शैक्षणिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

सवाल यह है कि जब स्कूल में पर्याप्त शिक्षक ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त ज्ञान कैसे मिलेगा? 70 से अधिक बच्चों की पढ़ाई, उनकी व्यक्तिगत जरूरतों और कक्षा-कक्ष की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी एक शिक्षक पर डालना शिक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती है।

शासन-प्रशासन से शिक्षक की व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। स्कूल में तत्काल पर्याप्त शिक्षकों की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि पहली से पांचवीं तक के बच्चों को कक्षावार बेहतर शिक्षा मिल सके। साथ ही बच्चों की सुरक्षा से संबंधित गुड टच-बैड टच जागरूकता और POCSO बॉक्स जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बच्चे देश का भविष्य हैं। यदि उन्हें समय पर पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिलेगी, तो इसका असर आने वाले वर्षों में उनके भविष्य पर पड़ सकता है। ग्राम खंडा का यह स्कूल शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करता है।