नवा रायपुर स्थित नंदनवन जंगल सफारी में आयोजित “प्रकृति दर्शन” कार्यक्रम ने इस वर्ष छात्रों को प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब तक 250 से अधिक स्कूल और कॉलेजों के लगभग 17,000 विद्यार्थी इस कार्यक्रम का हिस्सा बन चुके हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को वन्यजीवों और पर्यावरण के महत्व को समझाना और उनके संरक्षण की दिशा में जागरूक बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अनुभवी गाइड और प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा जंगल और उसकी पारिस्थितिकी के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें बाघ, भालू, घड़ियाल, सरीसृप और विभिन्न पक्षियों जैसे वन्यजीवों के व्यवहार, उनके प्राकृतिक आवास और उनके संरक्षण की महत्ता पर चर्चा की गई। इसके साथ ही, जंगल में पाई जाने वाली औषधीय और सामान्य वनस्पतियों की जानकारी भी साझा की गई।
विद्यार्थियों को पारिस्थितिकी तंत्र में वन्यजीवों की भूमिका, खाद्य श्रृंखला, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जानकारी दी गई। इन विषयों के माध्यम से छात्रों को पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बारे में भी समझाया गया।
नंदनवन जंगल सफारी के संचालक धम्मशील गणवीर ने कहा,
“नंदनवन जंगल सफारी का उद्देश्य न केवल लोगों को वन्यजीवों और प्रकृति के करीब लाना है, बल्कि उन्हें इनके महत्व को समझाकर संरक्षण के प्रति जागरूक बनाना है। 17,000 विद्यार्थियों की भागीदारी यह दर्शाती है कि आज की युवा पीढ़ी पर्यावरण और वन्यजीवों को लेकर गंभीर है। भविष्य में, हम इस कार्यक्रम को और व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को प्रकृति से जोड़ने का माध्यम बन रहा है, बल्कि उन्हें पर्यावरणीय मुद्दों को समझने और उनके समाधान में योगदान देने के लिए भी प्रेरित कर रहा है।






