पंडरिया।नगर के समीप स्थित ग्राम कुबा खुर्द हाफ नदी में बने डायवर्सन को पांच वर्ष से अधिक समय हो गए।लेकिन इससे एक एकड़ खेत मे भी सिंचाई नहीं होती है।दरअसल इस डायवर्सन से सिंचाई हेतु अब तक नहर निर्माण ही नहीं किया गया है।तात्कालीन रमन सरकार के दौरान 2016 में उक्त एनीकट का निर्माण किया गया था।जिसके लिए 6 करोड़ 44 लाख रुपये स्वीकृत किया गया था।एनीकट तो बना दी गई लेकिन नहर नहीं बनाया गया।जिसके चलते 6 करोड़ रुपये पानी मे बह गए।क्षेत्र के लोग इस एनीकट के बनने से अच्छी सिंचाई का सपना देखा था, लेकिन इसका कोई लाभ क्षेत्र को नहीं मिला।केवल ठेकेदार व विभाग के लोग एनीकट बनाकर अपना हिस्सा ले लिए,किसान को अपने हिस्से का पानी नहीं मिला।
जर्जर हो रहा एनीकट-एनीकट अब जर्जर होने लगा है।बंधान में दरारें पड़ गई है।वहीं छड़ भी बाहर दिखाई देने लगा है।इस एनीकट में गाद भी जमा हो गया है।जिसके कारण एनीकट के बराबर रेत से पट गया है। पानी भंडारण के लिए जगह नहीं है।इसके गेट भी खराब हो गए हैं।देखरेख व मरम्मत के आभाव में गेट खराब हो गई।वहीं एक रॉड भी चोरी हो गया है।विभाग ने इसका निर्माण करने के बाद इस ओर पलटकर नहीं देखा है।जल्द ही मरम्मत नहीं होगा तो लगे गेट भी पूरी तरह खराब हो जाएंगे व एनीकट टूट जाएगा।
निर्माण के समय से विवादित रहा– कुबा एनीकट निर्माण शुरु से ही विवादित रहा है।इसके निर्माण में लाल गिट्टी व स्थानीय रेत का उपयोग किया गया था।इसके अलावा बनने के तुरंत बाद दरारें आ गयी थी,जिसका मरम्मत किया गया था।क्षेत्र में एक भी बड़ी सिंचाई परियोजना नहीं होने के कारण क्षेत्र के किसान पूर्णतः मानसून पर निर्भर हैं।
सभी सिंचाई परियोजना अनुपयोगी-ब्लाक अंतर्गत हाफ नदी व आगर नदी में कई एनीकट बनाये गए हैं।लेकिन सभी एनीकट अनुपयोगी साबित हो रहे हैं।हाफ नदी पर घोघरा,कुबा खुर्द,दुल्लापुर गुरु,खम्हरिया,पेन्ड्रिकला,में एनीकट बनाया गया है।जिसमे केवल घोघरा में नहर निर्माण हुआ है,शेष में नहर निर्माण नहीं हुआ है।घोघरा में भी तकनीकी परेशानी होने के कारण केवल बरसात में अधिक पानी होने पर ही नहर में पानी आता है,जरूरत के समय पानी नहीं मिलता है।इसी तरह आगर नदी में दुल्लापुर बाजार में बने एनीकट से नहीं के बराबर सिंचाई होती है।क्षेत्र में सिंचाई पूरी तरह भूजल पर निर्भर है।केवल ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई की जाती है।

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