कृषि विभाग के गैर कृषि स्नातक उच्च न्यायालय के आदेश कर रहे मनगढ़ंत व्याख्या व मांग

रायपुर । छत्तीसगढ़ तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ पं.क्र. 6424 एवं संबंद्ध संगठन छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने कृषि विभाग में गैर कृषि स्नातक कर्मचारियों द्वारा माननीय हाईकोर्ट के आदेश 4742/2019 दिनांक 07/04/2022 की गलत व्याख्या कर कृषि विभाग में भ्रामक प्रचार प्रसार तथा अनुचित मांग की जा रही है।छत्तीसगढ़ कृषि विभाग अंतर्गत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से कृषि विकास अधिकारी पद पर पदोन्नति हेतु 04 दिसम्बर 2018 में शासन द्वारा नियम बनाया गया था। जिसमें कृषि स्नातक व गैर कृषि स्नातकों को 45-45 प्रतिशत पद व स्वेयर को 10 प्रतिशत पद पदोन्नति हेतु निश्चित कर राजपत्र में प्रकाशित किया गया था। इस नियम को बनाने का राज्य शासन का उद्देश्य कृषि आदानों जैसे बीज, जैविक खाद, रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों आदि की गुणवत्ता नियंत्रण व किसानों को गुणवत्ताहीन सामाग्रीयों से होने वाले नुकसान से बचाना था। गुणवत्ता नियंत्रण का अधिकार छत्तीसगढ़ शासन के राजपत्र के अनुसार केवल कृषि स्नातक कृषि विकास अधिकारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, अनुविभागीय कृषि अधिकारी व सहायक संचालक कृषि को ही है। यह नियम भारत शासन ने विभिन्न अधिसूचनाओं के तहत जारी किया है। वर्ष 2008 के पूर्व जो नियुक्तियाँ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पद पर की गई थी।

उनमें गैर कृषि स्नातकों की संख्या अत्यधिक थी। व कृषि स्नातकों की संख्या ना के बराबर थी। जिसके कारण कृषि विभाग में निरीक्षकों की कमी हो गई व कार्य प्रभावित होने लगा। कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए राज्य शासन द्वारा योग्यता धारी कृषि स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पदोन्नत कर कृषि विकास अधिकारी (निरीक्षक) के पद पर नियुक्त करने हेतु इस नियम का निर्माण किया गया।29 मई 2021 को इसी नियम के अंतर्गत 235 कृषि स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को पदोन्नत कर कृषि विकास अधिकारी के पद पर पदस्थापना की गई। जिसके पश्चात् राज्य के बीज, उवर्रक कीटनाशक आदि गुणवत्ता नियंत्रण का कार्य सूचारू रूप से चलने की दिशा में अग्रसर हुआ।वर्ष 2018 संशोधित पदोन्नति नियम के विरूद्ध गैर कृषि स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने माननीय उच्च न्यायालय में अपील की थी। आदेश क्रमांक WPS 4742/2019 के अंतर्गत दिनांक 07 अप्रैल 2022 को माननीय उच्च न्यायालय ने वर्ष 2018 में बने पदोन्नति नियम को अल्ट्रावायर्स घोषित कर दिया परन्तु राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रमोशन के संबंध में कोई टिप्पणी नहीं की माननीय न्यायालय ने केवल नियम पर टिप्पणी की है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के पश्चात् कृषि विभाग के पदोन्नति नियम को बनाए रखने शासन द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गई है। जिसका सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रदत्त डायरी क्रमांक 34789-2022 है।पदोन्नति के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवमानना की स्थिति नहीं है।उक्त माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की गलत व्याख्या कर गैर कृषि स्नातक ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों व विभाग के कुछ अधिकारियों के द्वारा शासन के नियमों के विपरीत पत्राचार कर पदोन्नति निरस्त किये जाने के संबंध में अनावश्यक कार्य किया जा रहा है। कुछ विभागीय अधिकारियों द्वारा पक्षपात कर पदोन्नत हुए 235 कृषि स्नातक कृषि विकास अधिकारियों को पदअवनत किया जाए एवं रिक्त पद में गैर कृषि स्नातकों को पदोन्नति दी जाए। जबकि माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय में कहीं पर भी इसका उल्लेख नहीं किया गया है। वर्तमान में छ.ग. शासन कृषि विभाग द्वारा पदोन्नति नियम को बनाए रखने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है।

उच्च अधिकारियों द्वारा पक्षपात का एक उदाहरण यह भी है कि कृषि विकास अधिकारियों के पदोन्नति आदेश में उच्च न्यायालय में लगे केस की याचिका क्रमांक का उल्लेख कर पदोन्नति को उसके अधीन रखा गया जबकि उच्च न्यायालय से पदोन्नति के संदर्भ में कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया था। अतः आदेश में याचिका क्रमांक का उल्लेख पूर्णतः अवैधानिक है। वर्तमान छ.ग. शासन दिनांक 20/12/2022 को संचालनालय कृषि से 01/04/2022 की स्थिति के कृषि विकास अधिकारी की वरिष्ठता सूची का प्रकाशन किया गया है। उसमें 29 मई 2021 में शासन के नियमों के तहत पदोन्नत हुए 235 कृषि स्नातक कृषि विकास अधिकारियों के नाम शामिल नहीं किया गया है। जबकि यह सभी कृषि विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत है।छ.ग. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष श्री चंद्रशेखर तिवारी एवं छ.ग. कृषि स्नातक शास. कृषि अधिकारी संघ के प्रांताध्यक्ष श्री मिथलेश साहू द्वारा संचालक कृषि को ज्ञापन देकर वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय की गलत व्याख्या और अनुचित मांग पर विभागीय अधिकारियों की पक्षपात पूर्ण की जा रही कार्यवाही के चलते संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।