सरपंच चंद्रिका साहू के नेतृत्व में मंदिरों से लेकर चौक-चौराहों तक चला सफाई अभियान, मां महामाया, शीतला और दुर्गा मंदिर परिसर की सफाई कर दिया स्वच्छता का संदेश

सरपंच बोलीं— गांव को साफ-सुथरा रखना केवल पंचायत की नहीं, हम सभी की जिम्मेदारी

पाटन। शक्ति की आराधना के पर्व नवरात्रि के पहले दिन पुरातात्विक गांव तरीघाट में स्वच्छता की एक नई तस्वीर देखने को मिली। एक ओर जहां भक्त मां दुर्गा की आराधना के साथ नवरात्रि पर्व का स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव को स्वच्छ और सुंदर बनाने के संकल्प के साथ महिलाएं सुबह-सुबह सफाई अभियान में जुट गईं। लगातार बारिश के बाद गांव में चरमराई सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरपंच चंद्रिका साहू ने स्वयं कमान संभाली। उनके नेतृत्व में 50 से अधिक महिलाओं ने गांव के प्रमुख चौक-चौराहों, नालियों और धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया।

यह अभियान महज औपचारिक सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि त्योहारों के दौरान धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की एक सामूहिक पहल के रूप में सामने आया। मां महामाया देवी मंदिर परिसर, शीतला मंदिर और भाटापारा स्थित दुर्गा मंदिर सहित गांव के प्रमुख स्थानों पर सफाई कर नवरात्रि के स्वागत को स्वच्छता से जोड़ने का प्रयास किया गया।
बारिश के बाद बिगड़ी व्यवस्था, सरपंच ने खुद संभाली कमान
लगातार बारिश के कारण गांव के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई थी। नालियों में गंदगी जमा होने और सार्वजनिक स्थानों पर साफ-सफाई की जरूरत महसूस होने के बीच नवरात्रि पर्व की शुरुआत ने पंचायत के सामने स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती खड़ी कर दी। ऐसे में सरपंच चंद्रिका साहू ने सफाई अभियान को प्राथमिकता देते हुए गांव में स्वच्छता की पहल शुरू की।
गांव की सफाई को केवल पंचायत कर्मचारियों की जिम्मेदारी मानने के बजाय सामूहिक भागीदारी से आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया। सुबह-सुबह महिलाएं अभियान में शामिल हुईं और अलग-अलग स्थानों पर साफ-सफाई का काम किया। नालियों से लेकर सार्वजनिक स्थलों तक स्वच्छता पर जोर दिया गया, ताकि त्योहार के दौरान ग्रामीणों और मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को साफ वातावरण मिल सके।
मां महामाया से दुर्गा मंदिर तक सफाई, धार्मिक स्थलों को दी प्राथमिकता
नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रहता है। इसे देखते हुए गांव के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया। मां महामाया देवी मंदिर परिसर, शीतला मंदिर और भाटापारा स्थित दुर्गा मंदिर में सफाई अभियान चलाया गया।
इसके साथ ही गांव के प्रमुख चौक-चौराहों और नालियों की भी सफाई की गई। अभियान के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि धार्मिक आयोजनों की पवित्रता केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर परिसर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
पुरातात्विक पहचान रखने वाले तरीघाट में धार्मिक स्थलों की साफ-सफाई के साथ गांव के सार्वजनिक स्थानों को व्यवस्थित रखने की यह पहल स्थानीय स्तर पर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
50 से अधिक महिलाओं की भागीदारी बनी अभियान की ताकत
इस स्वच्छता अभियान की खास बात महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। 50 से अधिक महिलाओं ने एकजुट होकर गांव की सफाई में योगदान दिया। सुबह के समय शुरू हुए इस अभियान में महिलाओं की सक्रियता ने यह संदेश दिया कि गांव की स्वच्छता और बेहतर वातावरण के निर्माण में समाज का प्रत्येक वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अक्सर त्योहारों के दौरान घरों और धार्मिक स्थलों की सफाई पर अधिक ध्यान दिया जाता है, लेकिन सार्वजनिक चौक-चौराहों और नालियों की स्वच्छता भी उतनी ही जरूरी है। तरीघाट में महिलाओं की सामूहिक पहल ने इसी जरूरत को सामने रखा। गांव के सार्वजनिक स्थलों की सफाई के जरिए स्वच्छता को केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया गया।
सरपंच चंद्रिका साहू का संदेश—स्वच्छ गांव बनाना हम सबकी जिम्मेदारी
अभियान का नेतृत्व कर रहीं सरपंच चंद्रिका साहू ने गांव की स्वच्छता को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि गांव को साफ-सुथरा रखना केवल पंचायत का काम नहीं है। इसमें प्रत्येक ग्रामीण की भागीदारी जरूरी है। त्योहारों के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के साथ रोजमर्रा के जीवन में भी स्वच्छता की आदत अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बारिश के बाद गांव की सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाना जरूरी था। नवरात्रि के पहले दिन महिलाओं के सहयोग से धार्मिक स्थलों, नालियों और प्रमुख चौक-चौराहों की सफाई की गई। गांव को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए सभी को आगे आना चाहिए।
सरपंच के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान ने गांव में स्वच्छता के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। महिलाओं की भागीदारी ने भी यह दिखाया कि इच्छाशक्ति और आपसी सहयोग से सार्वजनिक हित के कार्यों को गति दी जा सकती है।
त्योहार के बाद भी जारी रहनी चाहिए स्वच्छता की मुहिम
तरीघाट में नवरात्रि के पहले दिन चलाया गया सफाई अभियान अपने पीछे एक बड़ा सवाल भी छोड़ता है—क्या गांव में स्वच्छता की यह पहल केवल त्योहारों तक सीमित रहेगी या इसे नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा?
नालियों की नियमित सफाई, कचरे का उचित निपटान, सार्वजनिक स्थानों की देखरेख और धार्मिक स्थलों के आसपास स्वच्छता बनाए रखना किसी एक दिन का काम नहीं है। इसके लिए पंचायत की नियमित निगरानी और ग्रामीणों की निरंतर भागीदारी जरूरी है।
नवरात्रि के पहले दिन 50 से अधिक महिलाओं की सहभागिता और सरपंच चंद्रिका साहू की अगुवाई में शुरू हुई यह पहल गांव में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर बनी है। जरूरत इस बात की है कि इस अभियान की भावना पूरे वर्ष बनी रहे, ताकि बारिश के बाद सफाई व्यवस्था चरमराने जैसी स्थिति से बचा जा सके।
कुल मिलाकर, तरीघाट में नवरात्रि के पहले दिन मंदिरों से लेकर चौक-चौराहों तक चला सफाई अभियान आस्था, जनभागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता नजर आया। मां की आराधना के साथ गांव को स्वच्छ बनाने का संकल्प लेकर महिलाओं ने यह स्पष्ट किया कि स्वच्छता किसी एक विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जवाबदेही है।






