एक बार फिर बच्चों के पढ़ाई पर लगा ग्रहण, शिक्षक हड़ताल पर स्कूलें हुई बंद, आखिर सरकार और कर्मचारी अधिकारियों की आपसी लड़ाई में बच्चों का मध्यान्ह भोजन पर छिना हक

आशीष दास

कोंडागांव/बोरगांव । कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने सहित अन्य मांगों को लेकर शिक्षक संगठन सहित विभिन्न 71 संगठन एकजुट होकर एक बार फिर सोमवार से हड़ताल पर डटे हैं। हड़ताल के आज दूसरे दिन भी शिक्षक संगठनों ने भी हड़ताल को खुलकर समर्थन देते हुए स्कूल जाना बंद कर दिया। फेडरेशन के इस हड़ताल का शालाओं में व्यापक असर पड़ा है। इस चरण में सोमवार से लेकर 29 जुलाई तक पांच दिनों तक का आंदोलन करने की बात सामने आई। तो कई संगठन सोमवार से अनिश्चितकालीन के लिए हड़ताल पर जा चुके हैं। ऐसे में शिक्षा का मंदिर फिर आंदोलन से प्रभावित हो रहा है। सोमवार को स्कूल तो खुला लेकिन बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकारी स्कूलों में कोई शिक्षक नहीं रहें। जिले के प्रायः सभी स्कूलों के शिक्षक इस हड़ताल में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पढ़ाई पूरी तरह से ठप रहेगी। अब हड़ताल कब तक चलेगा इसका भी कोई ठिकाना नहीं है। एलान तो पांच दिनों का हुआ है। लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने न आने के चलते हड़ताल आगे जाने की भी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में बच्चों का भविष्य अंधकार में घिरता नजर आ रहा है। एक तो पिछले कोरोना काल में ऐसे ही पढ़ाई पिछड़ी हुई थी, अब नया सत्र शुरू तो हुआ है। लेकिन दो माह में ही व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है।

कर्मचारी अधिकारियों की हड़ताल ने छीना बच्चों का मध्यान्ह भोजन-

शिक्षक हड़ताल पर रहेंगे तो प्राइमरी, मिडिल स्कूलों में पढ़ाई नहीं होगी तो मध्यान्ह भोजन चलाने वाले रसोईया भी हड़ताल पर है जिसके चलते स्कूल में बच्चों को भोजन मिलना मुश्किल हो गया। हालांकि मध्यान भोजन वितरण पहले से ही प्रभावित है। क्योंकि रसोइए भी हड़ताल पर हैं और उस पर डेढ़ घंटे काम करने का सिलसिला भी चल रहा है। मध्यान भोजन जो कि बच्चों का हक है उससे उन्हें दूर रखा जा रहा है। आखिर सरकार और कर्मचारी अधिकारियों की आपसी लड़ई में बच्चों का मध्यान्ह भोजन छिना है।

हरेली उत्सव पर रहेगा हड़ताल का असर, स्कूलों में 28 को मनाया जाना है हरेली का पर्व-

28 जुलाई को शासन द्वारा स्कूलों में हरेली-गेड़ी पर्व मनाए जाने के निर्देश दिए गए है। हालांकि इस दिन सरकारी छुट्टी भी घोषित की गई है। स्कूली बच्चों को गेड़ी के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए विशेष आयोजन के निर्देश भी दिए गए हैं। जाहिर है कि अगर हड़ताल चलता रहा तो तो शिक्षक वापस होने वाले नहीं हैं। ऐसे में हरेली बिना शिक्षकों के मनाई जा सकती है। या फिर आयोजन भी रद्द हो सकते हैं।

हड़ताल से बच्चे की पढ़ाई हो रही प्रभावित- डीईओ

जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल का कहना है कि हड़ताल से पढ़ाई तो प्रभावित रहेगी लेकिन जिन स्कूलों में ट्यूटर, अतिथि शिक्षक यहां पर्याविक्षा अवधि वाले शिक्षक हैं वहां स्कूलों का संचालन हो रहा हैं। सिर्फ इंग्लिश मीडियम, सीबीएसइ पैटर्न, स्वामी आत्मानंद के संविदा शिक्षक ही हड़ताल नहीं कर रहे बाकी सभी शिक्षक आंदोलन पर जा रहे हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में उन्होंने कहा कि कल सोमवार को पूरे जिले में कुल 1985 स्कूलों में से 567 स्कूल संचालित रहे जहां ट्यूटर अतिथि शिक्षक व पर्यविक्षा अवधि वाले शिक्षकों द्वारा संचालन किया जा रहा है। मध्यान भोजन के बारे में उन्होंने कहा कि रसोइया भी हड़ताल पर होने के चलते बच्चों की मध्यान्ह भोजन भी बंद है। आगामी हरेली त्यौहार के आयोजन को लेकर उन्होंने कहा कि शिक्षक अगर हड़ताल से नहीं लौटते हैं तो कैसे मनाएंगे हरेली त्यौहार। आगे पीछे हो वो अलग चीज है लेकिन शालाओं में 28 तारीख को हरेली उत्सव मनाना संभव नहीं होगा।

शिक्षा मंत्री व मुख्यमंत्री ने नहीं दी कोई प्रतिक्रिया,-

छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के ब्लाक संयोजक भास्कर वर्मा का कहना है कि अब तक उनकी मांगों को लेकर शिक्षा मंत्री ना हीं मुख्यमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई है। जबकि इसके लिए लगातार आंदोलन चल रहा है। अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं देना खेद का विषय है। ब्लाक अध्यक्ष योगेश्वर साहू ने कहा कि भूपेश बघेल जी की सरकार सिर्फ किसानों को ही खुश करने में लगी हुई है। जबकि वे भूल गए हैं कि हम शिक्षक भी उन्हीं किसानों के बेटे हैं। उन्हें हम पर भी ध्यान देना चाहिए और हमारी मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए। जब तक मांगे पूरी हो जाती हम आंदोलनरत रहेंगे।