सच्ची श्रद्धा और तप से मिलते हैं भगवान: आचार्य महादेवगायत्री महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा में भक्ति का संदेश, पार्वती जन्म प्रसंग सुनाया

सेलूद। बाजार चौक सेलूद में आयोजित गायत्री महायज्ञ एवं शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा वाचक आचार्य महादेव ने कहा भगवान सबके जीवन में आते हैं… परंतु उनका साक्षात्कार हर कोई नहीं कर पाता। जिसके हृदय में भक्ति, श्रद्धा और सच्ची भावना होती है, वही भगवान को अनुभव करता है। जितनी हमारे भीतर गहराई होगी, उतना ही हम भगवान के करीब होंगे… क्योंकि भगवान बाहर नहीं, हमारे भीतर ही विराजमान हैं।
पार्वती जन्म कथा सुनाते हुए आचार्य महादेव ने कहा
जब-जब धरती पर अधर्म और असुरों का अत्याचार बढ़ता है, तब-तब भगवान अपनी लीला रचते हैं। इसी क्रम में माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपमान सहन न कर देह त्याग दी। भगवान शिव विरह में समाधि में लीन हो गए और सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा।


तब देवताओं की प्रार्थना पर आदिशक्ति ने पुनः जन्म लेने का संकल्प लिया। हिमालयराज और रानी मैना के घर एक दिव्य कन्या का जन्म हुआ यही माता पार्वती थीं। बचपन से ही उनके हृदय में भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति थी।
माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया। वर्षों तक वन में रहकर उन्होंने कठिन व्रत और साधना की। उनकी अटूट श्रद्धा और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
यह कथा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति, तप और समर्पण से असंभव भी संभव हो जाता है। माता पार्वती का जीवन त्याग, धैर्य और अटूट विश्वास का प्रतीक है, जो हर भक्त को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। मौके पर प्रमुख रूप से पूर्व सरपंच ख़ेमीन साहू, जयश्री वर्मा, दिव्या कलिहारी, एन के तिवारी, खेमलाल साहू, रमेश देवांगन,सुरज बंछोर, ललिता बनपेला, पीतांबरी साहू,सीता बंछोर, सत्यभामा बनछोर, अजय ठाकुर अशोक यादव, दिलेश्वरी देवांगन, टामन लाल, कृष्ण कुमार, अमरचंद साहू, मिन्की सिंह, अशोक राजपूत जगन्नाथ देवांगन, भागवत वर्मा, सुरेंद्र बंछोर, कौशल बनपेला, भोलाराम साहू, उर्वशी बंछोर, ललिता वर्मा, लाल सिंग, घनश्याम पटेल, नरसिंग देवांगन, केंवरा साहू, विमला साहू, अनुसूइय्या बंछोर, अर्जुन बंछोर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित थे।