संजय साहू
अंडा। छत्तीसगढ़ के बालोद व दुर्ग जिले की सीमा पर बसा एक गांव है ओटेबंद बगीचा,जो बालोद जिले में गुंडरदेही ब्लॉक में आता है। इस गांव के मंदिरों की अपनी विशेष पहचान है। जहां के विष्णुधाम में फागुन माह में होली के पहले 11 दिवसीय यज्ञ व भव्य मेला का आयोजन होता है। इस जगह पर एक ऐसी मूर्तियों की श्रृंखला है, जो देव उठनी पर केंद्रित है। तो उसकी बनावट ही उसकी खास पहचान बताती है। बालोद और दुर्ग जिले में यह एकलौता मंदिर है। जहां पर भगवान विष्णु शयन और लक्ष्मी के पैर दबाते क्षीरसागर में आराम की मुद्रा को दिखाया गया है। अब तक लोग तस्वीरों में ही इस तरह के दृश्य देखते रहते हैं या धार्मिक सीरियल में। लेकिन इस गांव के मंदिर में आप वृहद रूप से एक बड़े क्षेत्र पर बने इस मूर्तियों के श्रृंखला को देखकर आश्चर्य रह जाएंगे कि इसकी बनावट बहुत ही सुंदर कलाकृति के साथ की गई है। हर कोई जब इस मंदिर में जाता है तो इस क्षीरसागर रुपी मुद्रा को देखने के लिए आतुर होता है। और यहां पहुंच कर लोग भगवान विष्णु लक्ष्मी सहित अन्य देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं।


देव उठनी पर भी मंदिर समिति द्वारा इस जगह पर पूजा पाठ किया जाता है। आसपास के गांव के लिए यह देवस्थल प्रमुख माना जाता है। शादी विवाह के समय भी लोग यहां पर पूजा करने के लिए आते हैं। देव उठनी के साथ ही इस जगह का महत्व और बढ़ जाता है।
फागुन के दौरान जब यहां यज्ञ व मेला होता है तो दूसरे राज्यों से भी संत महात्मा आकर पूजा-पाठ और यज्ञ में शामिल होते हैं। तो वही लोग भी बड़ी संख्या में यहां जुटते हैं। बता दें कि इस मंदिर का निर्माण रायपुर के बंजारी धाम की तर्ज पर किया गया है।
कदम के पेड़ में नारियल और लाल कपड़ा बांधने से होता है मन्नत पुरा
इस वर्ष श्री विष्णु धाम महायज्ञ ओटेबंद बगीचा में 11 मार्च से 21 मार्च तक 11 दिवसीय महायज्ञ एवं भव्य मेला महोत्सव का आयोजन रखा गया है, श्री विष्णु धाम महायज्ञ ओटेबंद मंदिर में एक कदम का पेड़ है जिसमें कृष्ण राधा का अवतार है उस पेड़ पर जो भी समस्या का नाम से पूजा पाठ श्रद्धापूर्वक से करते हैं तो उसका मनोकामना पूर्ण हो जाता है , यह पेड़ लगभग 30 साल पुराना पेड़ है मंदिर के सदस्यों ने बताया की यह आयोजन 64 वां वर्षा विश्व कल्याणार्थ यज्ञ है यह क्षेत्र को जगत शंकराचार्य ने धर्मांतरण क्षेत्र का उपाधिय ओटेबंद विष्णु धाम को दिया है इस कदम पेड़ में दोनों नवरात्रि के समय ज्योति कलश स्थापना की जाती है। इस पेड़ का यह मान्यता है कि जैसे किसी महिला का संतान न होना या नौकरी के लिए या शारीरिक सुख संपत्ति विवाह गुमशुदा अगर हो जाता है तो एक नारियल फल और लाल कपड़े बाधने से मन से श्रद्धा भक्ति से पूजा अर्चना किया जाता है तो उसकी मनोकामना पूर्ण हो जाता है ।
बाजार ठेकेदार पूर्व सरपंच खेमन लाल चंद्राकार ने बाताया कि यहां के भव्य मेला में 11 दिवसीय तक बडे बडे मीना बाजार झुला लगे रहते हैं।.






