दुर्ग ।हमारी परंपरा प्रकृति ,खेती एवं दिनचर्या से जुड़ा हुआ है छत्तीसगढ़ में रोपा -बियासी के बाद हरेली तिहार में कृषि यंत्रों के पूजा की परंपरा है इस दिन नीम की टहनियाँ घर में लगाने की परंपरा का भी निर्वहन किया जाता है हमें अपनी छत्तीसगढ़िया पहचान नहीं भुलना चाही इसी से हमारी अस्मिता है मगर राज्य की वर्तमान सरकार हमारी पहचान खत्म कर रही है उक्त बातें छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ग्राम डुन्डेरा में आयोजित हरेली महोत्सव में मुख्य अतिथि के आसंदी से व्यक्त की
श्री बघेल ने कहा बोली,भाखा संस्कृति यही हमारी पहचान है उन्होंने भाजपा सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि मगर आज हमारे बोली, भाषा बदलने के काम किए जा रहे हमारी पहचान खत्म की जा रही है पूर्व में हमारी सरकार में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के माध्यम से फुगड़ी, गेड़ी दौड़ सहित विभिन्न छत्तीसगढ़िया खेल व संस्कृति को संस्कृति बढ़ावा दिया।



उन्होंने भाजपा पर प्रहार करते हुए कहा कि यह सरकार हर तरह से लुट रही है महतारी वंदन देकर भारी भरकम बिजली बिल भेज रही है, दूसरी ओर बिजली कटौती बढ़ गई है आत्मानंद स्कूल में फीस ले रही है, स्वास्थ्य सुविधा का हाल बेहाल है, गैस सिलेंडर की लगातार दाम बढ़ा रही है, डीएपी की किल्लत है, किसानों को व्यापारी के माध्यम से लूट रही , मंदिर में चंदा चोरी हो रही है उन्होंने सवाल उठाया जंतर मंतर में बच्चों पर लाठीचार्ज कौन किया मोदी एवं शाह संसद में आकर जवाब देने से बच रहे हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री के रूप छत्तीसगढ़ की संस्कृति को लगातार बढ़ाने का कार्य किया जिसके लिए उनके छत्तीसगढ़ के लोगों के बीच अलग पहचान है कार्यक्रम को महापौर शशी सिन्हा, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर, रामेश्वरी दिवाकर गायकवाड़ ने भी संबोधित किया कार्यक्रम के विशेष अतिथि सभापति केशव बंछोर, राजकुमार देशमुख, जगदीश दीपक, योगिता चंद्राकर, झमित गायकवाड़, अश्वनी साहू आदि थे स्वागत उदबोधन पवन बंजारे व आभार प्रदर्शन रोहित धनकर ने किया इस मौके पर छत्तीसगढ़ी लोक गायक खुमान सिंह यादव एवं ग्राम के कलाकारों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया साथ ही अतिथियों ने ग्राम के प्रतिभाओं व गणमान्य नागरिकों का सम्मान किया गया कार्यक्रम का प्रारंभ कृषि यंत्रों की पूजा अर्चना से हुआ इस दौरान अशोक साहू, रोमशंकर यादव, चेतन साहू, संजय साहू, उमाशंकर साहू, गौकरण साहू, उत्तरा साहू, धनेश्वर साहू, विजय साहू,गायत्री यादव, हिरौंदी साहू, धनेश्वरी देवांगन, मोहन यादव, बीआर मौर्य डीकेन्द्र हिरवानी, प्रहलाद वर्मा, दिवाकर गायकवाड़, अरुण वर्मा आदि मौजूद थे






