एक किसान की पीड़ा…

“साहब, पूरे साल खेतों में दिन-रात मेहनत करके फसल तैयार की थी। कर्ज लेकर बीज, खाद और दवाइयाँ खरीदीं। परिवार की उम्मीदें इसी फसल पर टिकी थीं। सोचा था कि फसल बिकेगी तो कर्ज चुकाएँगे, बच्चों की जरूरतें पूरी करेंगे और घर में खुशियाँ आएँगी।
लेकिन अर्नब तूफान ने पलभर में हमारी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया। खेतों में खड़ी फसल बर्बाद हो गई। अब खेतों में फसल नहीं, हमारी उम्मीदें उजड़ी पड़ी हैं।

साहब, किसान मौसम से लड़ सकता है, दिन-रात मेहनत कर सकता है, लेकिन प्रकृति की इस मार के सामने बेबस है। अब समझ नहीं आ रहा कि परिवार का पेट कैसे पालेंगे, कर्ज कैसे चुकाएँगे और अगली फसल की तैयारी कैसे करेंगे।
हम किसान हैं, भीख नहीं माँग रहे हैं। हमें हमारी बर्बाद हुई फसल का उचित मुआवजा और सरकार से मदद चाहिए, ताकि हम फिर से अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
हमारी फसल ही हमारी पूँजी है, हमारी मेहनत ही हमारी उम्मीद है। जब फसल ही नहीं बची, तो किसान कैसे बचेगा?”
— एक पीड़ित किसान






