पंडरिया : जंगल काटकर अतिक्रमण के खेत हो रहे तैयार,कटाई पर भी रोक नहीं!!

पंडरिया।नगर से करीब 5 किलोमीटर आगे बदौरा मार्ग पर अतिक्रमण के खेत तैयार हो रहे हैं।इसके अलावा जामुनपानी ,कुल्हि,सहित पूरे जंगल में अतिक्रमण का कार्य चल रहा है।वन विभाग के कर्मचारी प्रतिदिन इसे देख रहे हैं।इसके बावजूद इस पर किसी प्रकार कार्यवाही नहीं की जा रही है।क्रांति जलाशय के आस-पास करीब 7 एकड़ से अधिक वन भूमि तथा क्रांति जलाशय के डुबान क्षेत्र में वन विकास निगम के कक्ष क्रमांक 498 के जुताई कर खेत तैयार हो रहे हैं।जिसके बाद इसमें खेती की जाएगी।

ज्ञात हो कि कुछ वर्ष पहले उक्त स्थान पर करीब 13 एकड़ जंगल को काटकर खेती की जा रही थी।जिसे वन विभाग द्वारा बेदखल किया गया था।वहीं कुछ में पौधारोपण किया गया था।शेष खाली पड़े भूमि पर हल चलाकर अतिक्रमण किया जा रहा है।जल्द ही इस पर कार्यवाही नहीं की गई तो इसमें पुनः फसल तैयार हो जाएगी।बरसात के पूर्व क्षेत्र के वनों में खेती के लिए अतिक्रमण करने की होड़ सी लगी हुई है।लेकिन विभाग इसे रोकने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है।


कटाई पर रोक नहीं-वन क्षेत्र पंडरिया पूर्व व वन विकास निगम के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रतिदिन पेड़ो की अवैध कटाई होती है।वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इससे भली भांति अवगत हैं।लेकिन किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं करते हैं।बताया जाता है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों व नेताओं के संरक्षण के चलते विभाग के कर्मचारी इनके ऊपर कार्यवाही नहीं करते हैं।लेकिन इस संरक्षण के चलते जंगल समाप्त हो रहा है।बहुत जल्दी ये जंगल मैदान में तब्दील हो जाएंगे।बदौरा व आस-पास के जंगलों से प्रतिदिन 40 से 50 सायकल से जलाऊ लकड़ी का परिवहन किया जाता है,जिसे नगर के होटलों में खपाया जाता है।सायकल में दिन में दो या तीन बार लकड़ी ढुलाई की जाती है।अर्थात 100 से 150 वृक्षो की कटाई प्रति दिन की जाती है।विभाग कभी-कभार खाना पूर्ति के लिए कार्यवाही करती है।


मुख्यालय में नहीं रहते कर्मचारी– वनों को बचाने की जिम्मेदारी जिन वन रक्षकों, डिप्टी रेंजर ,चौकीदार व अन्य कर्मचारियों की है वे निर्धारित बिट मुख्यालय में नहीं रहते हैं।जिसके कारण लकड़ी कटाई करने वाले बेख़ौफ़ होकर लकड़ी कटाई करते हैं।