पाटन: सेवा सेतु अभियान में खाली पड़ी कुर्सियां, प्रचार-प्रसार के अभाव में शिविर पर उठे सवाल, आम जनता की कम रही भागीदारी, विभागीय स्टॉल भी रहे सूने; आयोजन औपचारिकता तक सीमित होने की चर्चा

पाटन। जनपद पंचायत पाटन द्वारा सेवा सेतु अभियान के तहत ‘सरकार आपके द्वार’ शिविर का आयोजन सतनाम भवन में किया गया। शिविर का उद्देश्य आम लोगों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और विभागीय सेवाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना था, लेकिन आयोजन में आम जनता की अपेक्षाकृत कम भागीदारी देखने को मिली।

शिविर स्थल पर लगाए गए अधिकांश विभागीय स्टॉल पर भी लोगों की आवाजाही कम रही। कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली नजर आईं। वहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी और अधिकारी ही अधिकांश समय अपनी-अपनी जगह पर बैठे दिखाई दिए।

व्यापक प्रचार-प्रसार का अभाव बना चर्चा का विषय

स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच यह चर्चा रही कि शिविर को लेकर पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। यदि आयोजन से पहले गांवों और नगर क्षेत्र में व्यापक जानकारी पहुंचाई जाती तो अधिक संख्या में लोग अपनी समस्याएं और आवेदन लेकर शिविर तक पहुंच सकते थे।

शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल तो लगाए गए, लेकिन कई स्टॉल पर लोगों की मौजूदगी नहीं होने से वे खाली-खाली नजर आए। ऐसे में सरकार की योजनाओं और सेवाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य पर भी सवाल उठते रहे।

दिनभर के शिविर में भोजन व्यवस्था की जगह दिया गया पोहा

दिनभर चलने वाले शिविर में आने वाले लोगों के लिए भोजन व्यवस्था को लेकर भी चर्चा रही। आयोजन में भोजन के स्थान पर पोहा नाश्ते के रूप में उपलब्ध कराया गया। हालांकि, आयोजन की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।

आयोजन की उपयोगिता पर उठे सवाल

सेवा सेतु अभियान के तहत सरकार की सेवाओं को जनता के करीब पहुंचाने और लोगों की समस्याओं का मौके पर निराकरण करने की मंशा है। लेकिन पाटन में कम जनभागीदारी के चलते शिविर अपेक्षित रूप से प्रभावी नजर नहीं आया। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे शिविरों को सफल बनाने के लिए पहले से व्यापक प्रचार-प्रसार और ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी जानकारी पहुंचाना जरूरी है।

आम जनता की कम उपस्थिति और कई विभागीय स्टॉल के सूने रहने के कारण यह आयोजन महज औपचारिकता बनकर रह गया, ऐसी चर्चा शिविर स्थल पर दिनभर बनी रही।