पाटन। नगर पंचायत पाटन का राजीव सरोवर इन दिनों अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। पिछले करीब चार महीने से सरोवर परिसर की लाइटें बंद होने के कारण शाम होते ही पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है। मॉर्निंग और इवनिंग वॉक करने वाले लोगों को अंधेरे में टहलना पड़ रहा है। कई लोग रास्ता देखने के लिए मोबाइल की टॉर्च का सहारा लेने को मजबूर हैं। सरोवर परिसर में लोगों के व्यायाम के लिए बनाया गया ओपन जिम भी टूट-फूट की स्थिति में है। वहीं बैठने के लिए लगाई गई कई कुर्सियां भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद लंबे समय से व्यवस्था सुधारने की दिशा में ठोस पहल नहीं होने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राजीव सरोवर के निर्माण और सौंदर्यीकरण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वर्तमान स्थिति देखकर रखरखाव व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधि समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

राजनीतिक बयानबाजी से आगे कब होगा काम?

राजीव सरोवर की बदहाल स्थिति को लेकर अब राजनीतिक नारों और दावों पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो या नगर पंचायत के जनप्रतिनिधि, आम जनता को इससे मतलब है कि सार्वजनिक सुविधाएं बेहतर रहें। लेकिन चार महीने से लाइट बंद रहने और ओपन जिम व बैठने की व्यवस्था बदहाल होने से सरोवर की उपेक्षा साफ नजर आ रही है।लोगों ने नगर पंचायत से जल्द से जल्द सरोवर की बंद लाइटें चालू कराने, टूटे ओपन जिम उपकरणों एवं कुर्सियों की मरम्मत कराने तथा नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।







