पाटन। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन दुकानों में वितरित किए जा रहे चावल की गुणवत्ता को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। कई हितग्राहियों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कीड़ेयुक्त और खराब गुणवत्ता वाला चावल दिया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सोरम के ग्रामीणों का कहना है कि जानकारी के अभाव में कई परिवार यह सोचकर ऐसे चावल का उपयोग कर लेते हैं कि राशन मुफ्त या रियायती दर पर मिल रहा है। लोगों का मानना है कि लंबे समय तक खराब गुणवत्ता वाले खाद्यान्न का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार गरीब परिवारों को गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराने के लिए पीडीएस व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तब राशन दुकानों में खराब और कीड़ेयुक्त चावल कैसे पहुंच रहा है। उन्होंने पूछा कि क्या ऐसे चावल मानव उपभोग के योग्य हैं और इसकी जिम्मेदारी किस विभाग या अधिकारी की है।
लोगों का कहना है कि राशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जवाबदारी संबंधित विभाग, भंडारण एजेंसियों और वितरण व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की होती है। यदि खाद्यान्न में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी पाई जाती है तो इसकी जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
नागरिकों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा चावल के नमूनों की गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी क्षेत्र में कीड़ेयुक्त चावल वितरण की शिकायत है तो इसकी लिखित शिकायत अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम), खाद्य विभाग अथवा जिला प्रशासन को की जा सकती है, ताकि जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि हितग्राहियों को गुणवत्तायुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।






