रूपेश वर्मा

अर्जुनी । एक तरफ किसान वर्ग अपने फसलों को लेकर चिंतित है, ऊपर से बारिश की बेरुखी ने सभी का जीना मुहाल कर रहा है ऊपर से उमस भरी गर्मी में बिजली विभाग की आंख मिचौली ने ग्रामीणों जीना मुश्किल कर रखा है । क्षेत्र में अनियंत्रित बिजली कटौती ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है रात हो या । दिन पल – पल में बिजली कटौती किया जा रहा है। एक ओर शासन सरप्लस बिजली दम भरता है तो दूसरी ओर विभाग के आलाधिकारी इस पर बट्टा लगा रहे है, कई तरह के तर्क देकर हर पांच, दस, आधा घण्टे में बिजली काट रहे जिससे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त होते जा रहा है।
” _ना दिन को सुकून है, ना रात को चैन है “_
अर्जुनी क्षेत्र के आम नागरिकों की हालत को पूरी तरह बयाँ करती हैं। एक तरफ उमस ने हाल बेहाल कर रखा है, तो दूसरी ओर अनियंत्रित बिजली कटौती ने आफत बन रखा है। बता दे कि दन भर बिजली की आंख मिचोली लगातार बना रहता है, सुबह होते ही बिजली चली जाती है, और रात को तो हद ही हो जाता है।
स्कूली छात्र,व्यापारी,किसान ,
बीमार वृद्धजन के लिए मुसीबत
वंही स्कूल जाने वाले बच्चे, खेतों में मेहनत करने वाले किसान व्यवसायी वर्ग,मोबाईल व इलेक्ट्रिक व वेल्डिंग दुकान संचालक सहित बीमार वृद्धजन सभी इस बिजली संकट से परेशान हैं। दोपहर की उमस भरी गर्मी में पंखा बंद, पानी की मोटर बंद, और घर के अंदर बैठना भी मुश्किल। पढ़ाई रुकी, काम रुके, आराम तो जैसे अब सपना बन चुका है।
विभाग की शिकायत पर अनदेखी
स्थानीय प्रशासन से लेकर विद्युत विभाग तक कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, मगर स्थिति जस की तस बनी हुई है। अधिकारी व कर्मचारी एक ही जवाब देते है लाइन में फॉल्ट है, मेंटनेश का काम चल रहा है। पता नही महीने भर में इनका मेंटनेश काम कितने बार चलता है हाल ही में बिजली सुधार के नाम पर दिनभर विद्युत अवरुद्ध किया गया था। जिसमे अर्जुनी में दिनभर बिजली प्रभावित था। उसके बाद भी बार- बार बिजली काटना ये कैसा मेंटनेश है, जिससे विभाग ही अपने ऊपर सवाल खड़े कर रहे है। बिजली की शिकायत पर सब स्टेशन से मामले की जानकारी लिए जाने पर एक ही उत्तर सुनने में आता है कि लाइन फाल्ट है। वंही लाइन फाल्ट के विषय मे लाइन मेन को इस संबंध में पूछे जाने बंदर का तार में कूदा जाना बताया जाता है। ऐसे दिन भर कितने बार लाइन फाल्ट और बंदर का हवाला विभाग के कर्मचारियों द्वारा मिलता है । जिसका खामियाजा आम ग्रामीण व उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है जो कि विभाग की गंभीर लापरवाही को दर्शा रहा है। जिस पर प्रशासन द्वारा उचित कार्यवाही की मांग ग्रामीणों ने किया है।






