पूर्व व्यावसायिक शिक्षा से विद्यार्थियों को मिल रहा हुनर, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बठेना में सीमेंट गमला निर्माण का प्रशिक्षण

राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक नरोत्तम साहू की पहल से विद्यार्थी सीख रहे शिल्पकला एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा के गुर

राजू वर्मा पाटन।शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बठेना में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) के अनुरूप विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, रचनात्मक और रोजगारोन्मुखी शिक्षा से जोड़ने के लिए एक सराहनीय पहल शुरू की गई है। इस नवाचार के तहत स्कूल के बच्चों को सीमेंट के आकर्षक गमले बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

यह अनूठी पहल राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक श्री नरोत्तम कुमार साहू द्वारा की गई है। वे स्कूल के अंतिम कालखंड (लास्ट पीरियड) और ‘बैगलेस डे’ के अवसर पर बच्चों को विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर हुनरमंद बना रहे हैं।

बच्चों में विकसित हो रही उद्यमशीलता की भावना

इस प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थी न केवल सीमेंट के गमले बनाने की तकनीकी प्रक्रिया को समझ रहे हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता, कलात्मक अभिरुचि और कार्यकुशलता का भी विकास हो रहा है। शिक्षकों का मानना है कि इस प्रकार की व्यावहारिक गतिविधियों से बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान, आत्मनिर्भरता, नवाचार और उद्यमशीलता (बिजनेस माइंडसेट) की भावना पैदा होती है। साथ ही, उन्हें भविष्य में स्वरोजगार चुनने के लिए एक शुरुआती अनुभव और मंच भी मिल रहा है

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) की अवधारणा को साकार करने का प्रयास

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में विद्यार्थियों के अनुभवात्मक अधिगम (Learning by Doing), कौशल विकास और स्थानीय कला व शिल्प को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए शिक्षक श्री साहू विद्यालय में बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ शिल्पकला और रोजगारोन्मुखी कौशलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। उनका उद्देश्य बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यावहारिक जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। ‘बैगलेस डे’ का ऐसा रचनात्मक उपयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

अधिकारियों ने की मुक्तकंठ से सराहना

बठेना स्कूल में चल रही इस नवाचारी गतिविधि की शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों ने सराहना की है। विकासखंड स्त्रोत केंद्र पाटन के बीआरसीसी श्री जी.पी. वर्मा एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) पाटन श्री डी.के. देवांगन ने इस पहल को विद्यार्थियों के व्यावहारिक ज्ञान और कौशल विकास के लिए एक बेहद उपयोगी प्रयास बताया है।इस पहल से यह साफ संदेश जाता है कि जब शिक्षा को जीवनोपयोगी कौशलों से जोड़ा जाता है, तो विद्यालय केवल किताबी ज्ञान का केंद्र नहीं रह जाते, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन जाते हैं।

“प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशेष प्रतिभा छिपी होती है। आवश्यकता सिर्फ इस बात की है कि उन्हें सही अवसर, सही मार्गदर्शन और अनुकूल वातावरण मिले। स्कूल में इस तरह की गतिविधियों के जरिए हम बच्चों को आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर बनाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।”
– श्री नरोत्तम कुमार साहू, राज्यपाल पुरस्कृत शिक्षक