वर्ष भर की तुलना के अनुसार इन दोनों सब्जियों के दाम सबसे कम होते हैं लेकिन इस बार स्थिति बिलकुल उलट है। लंबे समय तक हुई बारिश और अक्टूबर तक जारी रहे मौसम के असामान्य मिजाज ने स्थानीय फसलों को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसका सीधा असर सब्जियों के दामों पर पड़ा है। पिछले साल नवंबर में ₹10 किलो मिलने वाला टमाटर आज 50-60 रुपए किलो बिक रहा है । इसी तरह लौकी ,भाटा, भिंडी, मिर्च सहित अधिकांश सभी सब्जियों की कीमतें भी दुगनी तक पहुंच गई है ।
इस समय रायपुर में करीब 50 60% सब्जियों की आपूर्ति स्थानी किसानों से हो रही है। जबकि पिछले वर्ष नवंबर के समय 80 90% सब्जियों की आपूर्ति स्थानी किसान कर रहे थे । टमाटर ,लौकी ,भाटा ,करेले , खीरा भाजी, पालक एवं लाल भाजी, मेथी और शिमला मिर्च जैसी सब्जियों का मुख्य उत्पादन यहां के आसपास के क्षेत्र से होता है ।फसले पानी में डूबने और लगातार नमी बने रहने से प्रभावित हुई जिसके कारण बाजार में आवक कम हो गई ।
शहर की सप्लाई में चैन बिगड़ी : शहर की आधी से ज्यादा सब्जियों की निर्भरता आसपास के ग्रामीण इलाकों पर है। लेकिन इस बार इन क्षेत्रों में छोटे किसानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ। खराब मौसम के कारण कई किसानों की फैसले खेत में ही गल गई। जिस सब्जियों की सप्लाई बाहर से होती है वह भी महंगी पड़ने लगी , क्योंकि परिवहन और मंडियों में भाड़ा बढ़ गया है। फल स्वरुप शहर के बाजारों में सब्जियों की नियमित उपलब्धता बाधित हुई और खुदरा दुकानों को भी कई बार कम माल मिल रहा है जिसे दामों में अचानक उछाल आया है।
इन राज्यों से आती है सब्जियां :
रायपुर में मटर, गाजर मूंनगा और धनिया मुख्यत :मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आता है। फूल गोभी की आपूर्ति महाराष्ट्र और पत्ता गोभी के आपूर्ति मूल तलई (मध्य प्रदेश) से होती है । जबकि आलू उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सेआते हैं । अदरक कर्नाटक और मध्य प्रदेश तथा परवल पश्चिम बंगाल से पहुंचता है ।







