डोंगरगढ़ राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाललंबे समय से जमे कर्मचारियों को लेकर लोगों में नाराजगी, पारदर्शिता की मांग तेज

केशव साहू
डोंगरगढ़/राजनांदगांव। डोंगरगढ़ राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय लोगों और ग्रामीणों का कहना है कि विभाग में कई कर्मचारी लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं, जिससे आम जनता के बीच असंतोष बढ़ रहा है। लोगों का आरोप है कि कुछ कर्मचारियों की कार्यशैली ऐसी हो गई है मानो कार्यालय व्यक्तिगत व्यवस्था बन गया हो, जिसके कारण आम लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कार्यों में लोगों को कई बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। लोगों का आरोप है कि प्रक्रियाओं को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाया जा रहा है, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शासन लगातार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि लंबे समय से एक ही जगह पदस्थ रहने के कारण कई कर्मचारियों का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे आम लोगों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जाए तथा समय-समय पर कर्मचारियों का स्थानांतरण कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यालय जनता की सुविधा के लिए होते हैं, इसलिए वहां कार्यप्रणाली सरल, जिम्मेदार और जवाबदेह होनी चाहिए।
क्षेत्र में अब यह चर्चा आम हो गई है कि क्या प्रशासन राजस्व विभाग की व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगा। लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और शासन पर टिकी हैं कि आम जनता की शिकायतों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।