रानीतराई/पाटन: पाटन विकासखंड के ग्रामों में पिछले करीब पांच महीनों से पेंशन नहीं मिलने के कारण गरीब विधवा एवं वृद्धजन भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। अपनी आजीविका और इलाज के लिए इस पेंशन पर निर्भर हितग्राही अब जनपद पंचायत के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
जनपद सदस्य रश्मि भेदप्रकाश वर्मा (पाटन-असोगा) ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गरीबों को मिलने वाली मासिक पेंशन का वितरण लंबे समय से बंद है, जो सीधे तौर पर उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने बताया कि गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले हितग्राहियों को प्रतिमाह ₹500 की पेंशन मिलती थी, जिससे वे अपनी दवाइयों और इलाज का खर्च चलाते थे। पेंशन बंद होने से 80 से 90 वर्ष तक के बुजुर्गों को सबसे अधिक दिक्कत हो रही है।
वर्मा के अनुसार, कई वृद्धजन अपनी पेंशन की मांग को लेकर जनपद पंचायत पाटन के लगातार चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
वहीं विधायक प्रतिनिधि अशोक साहू ने कहा कि पेंशन योजनाओं में वर्ष 2007-08 की गरीबी रेखा सूची को अनिवार्य किए जाने के कारण बड़ी संख्या में पात्र लोग वंचित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई वास्तविक गरीब परिवार पुरानी सूची में नाम नहीं होने के चलते योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
साहू ने सवाल उठाया कि गरीबी रेखा का सर्वे 2007-08 में किया गया था, जिसकी वैधता अब समाप्त हो चुकी है। नियमानुसार हर 10 वर्षों में नया सर्वे होना चाहिए, लेकिन लगभग 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक नया सर्वे नहीं कराया गया है, जो सरकार की उदासीनता को दर्शाता है।







