दुर्लभ प्रवासी पक्षी स्टेप गल पाँच वर्षों बाद छत्तीसगढ़ में दर्ज……राजनांदगांव के रुसे जलाशय में अटावी फाउंडेशन बर्ड वॉक के दौरान दिखा ये पक्षी

राजू वर्मा

मध्य भारत के पक्षी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण खोज के रूप में स्टेप गल (Larus fuscus barabensis) का अवलोकन अटावी फाउंडेशन द्वारा आयोजित बर्ड वॉक के दौरान किया गया। यह एक अत्यंत दुर्लभ शीतकालीन प्रवासी है और लेसर ब्लैक बैक्ड गल की उपप्रजाति है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन बीएनएचएस प्रमाणित फील्ड ऑर्निथोलॉजिस्ट प्रतीक ठाकुर ने किया। प्रतिभागियों में डॉ दनेश सिन्हा, योगेन्द्र साहू और सोमेन्द्र साहू शामिल थे।

रूसे जलाशय, जो कॉमन क्रेन और यूरेशियन स्पूनबिल के आगमन के लिए जाना जाता है, ने दो घंटों में 51 पक्षी प्रजातियां दर्ज कीं। वॉक के दौरान एक अन्य प्रवासी पक्षी सैंड मार्टिन का भी रिकॉर्ड मिला। प्रतीक ठाकुर और अविनाश भोई द्वारा यहां कॉमन क्रेन की खोज के बाद यह स्थल अब छत्तीसगढ़ के पक्षी प्रेमियों का प्रसिद्ध हॉटस्पॉट बन गया है।

पांच वर्षों बाद महत्वपूर्ण रिकॉर्ड
स्टेप गल छत्तीसगढ़ जैसे आंतरिक क्षेत्रों में अत्यंत दुर्लभ है। पिछले पुष्टि किए गए रिकॉर्ड इस प्रकार हैं:
2019 – भिलाई (अनूप नाइक)
2020 – रायपुर (जगेश्वर वर्मा)
इसी कारण 2025 का रूसे जलाशय रिकॉर्ड बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पहचान (1st विंटर स्टेप गल)
इस पक्षी में हल्की इनर प्राइमरी विंडो, मजबूत विंगबार्स और कई सेकंड जनरेशन मीडियन कवरट्स दिखाई दिए, जो 1st विंटर स्टेप गल की मुख्य पहचान हैं। इसका हल्का भूरा पंख, पतली गहरी चोंच और हल्की धारियों वाला सिर इसके अवलोकन की पुष्टि करता है।

यह रिकॉर्ड रूसे जलाशय के पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है और छत्तीसगढ़ के पक्षी विज्ञान में एक मूल्यवान जोड़ है।