पंडरिया।ब्लाक के ग्राम रोहरा केशव गौशाला में मंगलवार को दुर्लभ सत्संग में छठवें दिन प्रवचन सम्पन्न हुआ।सात दिवसीय दुर्लभ सत्संग बुधवार को सम्पन्न होगा।जिसमें स्वामी विजयानंद गिरी ने कहा कि समय बहुत कीमती है,समय का सदुपयोग कीजिये।हर पल हमारी जिंदगी कम होती चली जा रही है।हम हर पल मर रहे हैं।समय को भगवान के भजन में मन लगाओ,समाज सेवा व अच्छे कार्यों में समय का उपयोग करो। समय को व्यर्थ मत करो। गिरी ने कहा कि संसार मे किसी से संबंध मत बनाओ।गुरु भगवान का बाप हो सकता है,लेकिन भगवान नहीं हो सकता है।कहा जाता है कि कण कण में भगवान है ,लेकिन कण – कण ही भगवान है।


गिरी महाराज ने बताया कि मोह ही सभी व्याधि की जड़ है।ज्यादा मोह ही परेशानी का कारण है।किसी से सीधा संबंध मत जोड़ो,बीच मे भगवान को ले आइए ,फिर मोह प्रेम में बदल जायेगा।उन्होने बताया कि अगला जन्म अंतकाल के चिंतन के अनुसार होता है।मरते समय कुत्ते की याद आ गई तो कुत्ता बन जायेगा।यदि भगवान की याद करेंगे तो भगवान के स्वरूप की प्राप्ति हो जाएगी। अंतकाल के समय गीता का आठवें अध्याय सुनाना चाहिए,जिससे उन्हें मुक्ति मिलेगी।उन्होंने कहा कि संबंध जोड़ना है तो भगवान से जोड़ना जोड़िए।भगवान को जिस रूप में स्वीकार करेंगे भगवान उसी रूप में आपको मिल जाएंगे।

संसार से संबंध जोड़ने पर संसार मे भटकते रहेंगे।लोक और परलोक दोनों बिगड़ जाएगा।उन्होने गौ माता पर कहा कि जिस गौमाता से श्रीकृष्ण प्रेम करते थे,उन्हें चराने जाते थे,अब वही गौमाता को चारा नहीं मिल पा रहा है।गौमाता प्लास्टिक खाने मजबूर हैं।उन्होंने बताया कि जिस घर मे गौ माता है वह पवित्र हो जाता है,इसके विपरीत जिस घर में कुत्ता रहता है वह घर अशुद्ध रहता है।ऐसे घर मे देव प्रवेश नहीं करते हैं।
पाखंड करने वाले गुरु पर कटाक्ष– गिरी ने आधुनिक गुरु पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अभी अधिकांश गुरु अपनी पूजा कराने में लगे हुए हैं।वर्तमान गुरु पर कटाक्ष करते हुए कहा कि गुरु गोविंद दोनों खड़े हैं,तब गुरु की महिमा है।लेकिन आजकल केवल गुरु ही रहते हैं।गोविंद उनके साथ नहीं रहते हैं।सच्चा गुरु वह है जो भगवान से साक्षात्कार करवा दें।लेकिन आजकल भगवान को नीचे कर गुरु को ऊपर दिखने का प्रयास करता है।वहीं शिष्य भी कई हैं। जो शिष्य गुरु का चित्र लेकर सेवा करता है वह घटिया दर्जा का है।लेकिन जो शिष्य बिना चित्र के मन से अपने गुरु का सेवा करते हैं वही सच्चे शिष्य हैं।उन्होने पाखंड वाले गुरु से बचने की बात कही।






