अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हिंदी माध्यम ट्यूटर की हुई भर्ती, पक्षपात का लगा आरोप

आशीष दास

कोंडागांव/बोरगांव । कार्यालय जिला कलेक्टर द्वारा सभी विकास खंडों में शिक्षक वहीन व एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने स्थानीय पात्र शिक्षित बेरोजगार युवाओं को कोचिंग ट्यूटर भर्ती हेतु कुछ नियम एवं शर्तों के साथ आदेश जारी किया। जिसकी चयन प्रक्रिया स्थानीय नगर पंचायत व ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के साथ शाला विकास समिति द्वारा करना था। जिसमें संबंधित ट्यूटर स्थानीय निवासी होना अनिवार्य के साथ ही पुराने ट्यूटर को प्राथमिकता देते हुए योग्यता के आधार पर ट्यूटर नियुक्त करना था और सरकारी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से ही पढ़े हुए शिक्षित बेरोजगारों युवाओं को प्राथमिकता देनी थी।

प्रस्ताव देने में नगर पंचायत ने बरती लापरवाही-

नगर पंचायत फरसगांव में ट्यूटर भर्ती पर पक्षपात करने का आरोप लग रहा है। दरअसल नियम के तहत नगर पंचायत के स्थानीय बेरोजगार निवासी को प्रस्ताव बनाकर शाला विकास समिति को अग्रेषित करना था। लेकिन नगर पंचायत द्वारा सभी नियम निर्देशों को ताक में रखते हुए सभी स्थानीय आवेदन कर्ताओं को प्रस्ताव दे दिया गया। इन आवेदन कर्ताओं को प्रस्ताव देते समय इनको नियम के बारे में बताए नहीं गया कि अंग्रेजी स्कूल में केवल अंग्रेजी माध्यम से पढ़े आवेदक ही आवेदन कर सकते हैं। जिससे जनपद प्राथमिक शाला फरसगांव अंग्रेजी माध्यम स्कूल के लिए ट्यूटर का एक पद हेतु अंग्रेजी माध्यम के साथ साथ हिंदी माध्यम के युवाओं ने भी आवेदन कर दिया और सभी आवेदकों को नगर पंचायत से प्रस्ताव बनाकर दे दिया गया।

इस पक्षपात में एसएमसी सदस्यों ने निभाई अहम भूमिका-

बता दें कि शाला विकास समिति द्वारा शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय स्कूलों में ट्यूटर भर्ती योग्यता के आधार पर चयन किया जाना था। लेकिन समिति के कुछ लोगों की दबाव में बाकी सदस्यों को नियम की जानकारी न देते हुए अपने मनमर्जी रूप से अपने मातहतों को ट्यूटर भर्ती करा कर फायदा पहुंचाया गया। इस विषय पर नगर पंचायत के पार्षद संगीता पुजारी का कहना है कि वह भी उस शाला विकास समिति के सदस्य हैं लेकिन ट्विटर भर्ती समय उन्हें नियमों को नहीं बताया गया जिसके चलते उन्होंने हस्ताक्षर किया।

आवेदकों ने एसएमसी पर लगाया पक्षपात का आरोप-

स्कूलों को समुदाय से जोड़ने के लिए सभी स्कूलों में शाला विकास समिति बनाया गया, ताकि बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता पूर्ण हो। लेकिन बच्चों की गुणवत्ता शिक्षा को दरकिनार कर शाला विकास समिति द्वारा अपने चाहतों को ट्यूटर चयन करना शिक्षा की गुणवत्ता पर सवालिया निशान है ऐसे में अपात्रों का चयन करने से कैसे मिलेगा बच्चों की को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा।

नगर पंचायत फरसगांव में जनपद प्राथमिक शाला अंग्रेजी माध्यम स्कूल के लिए कई अंग्रेजी माध्यम व हिंदी माध्यम के आवेदक ने आवेदन दिया था।आवेदिका रेणुका मरकाम ने समिति पर आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में नियम के विरुद्ध पक्षपात कर अंग्रेजी माध्यम आवेदकों को हटाकर हिंदी माध्यम में पढ़ें आवेदक का चयन किया गया।

वहीं नगर पंचायत के आश्रित ग्राम पासंगी में सभी नियम कायदों को ताक में रखकर पक्षपातपर्ण चयन किया गया। आवेदिका अमृता भारद्वाज ने कहती हैं कि प्राथमिक शाला पासंगी प्लाट पारा में एक ट्यूटर पद खाली था जिसमें उन्होंने आवेदन किया था। आवेदन के साथ बकायदा अनुभव प्रमाण पत्र, डीएलएड प्रमाण पत्र, सहित सभी फॉर्मेलिटीज पुरा कर रिज्यूम डाल दिया गया था। लेकिन समिति द्वारा नियम विरुद्ध चयन करते हुए उनके आवेदन को निरस्त कर केवल 12वीं पास वाली किसी आवेदिका का चयन किया गया। दोनों आवेदिकों ने उक्त ट्विटर चयन प्रक्रिया की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।

क्या कहते हैं जिला शिक्षा अधिकारी-

इस मामले की पूरी जानकारी देने पर जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल ने कहा कि अगर ट्यूटर का चयन ऐसा हुआ तो बहुत ही गलत हुआ। ट्विटर भर्ती नियम के अनुसार ऐसा नहीं होना था। नियम के तहत अंग्रेजी माध्यम स्कूल में केवल अंग्रेजी माध्यम के ही ट्यूटर का भर्ती होना था। इस विषय पर बीईओ से जानकारी लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।