संगीत नाटक अकादमी ने आईआईटी भिलाई के साथ मिलकर ’प्रातिज्ञ’ का आयोजन किया…छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति को बचाने और बढ़ावा देने की एक पहल

दुर्ग।भारत सरकार की संगीत नाटक अकादमी का सांस्कृतिक कार्यक्रम ’प्रातिज्ञ’, 30 जुलाई 2026 को आईआईटी भिलाई कैंपस के नालंदा लेक्चर हॉल में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम ’सेंटर फॉर स्टडीज़ ऑन कल्चर, लैंग्वेज एंड ट्रेडीशन्स’ (सीसीएलटी) की साझेदारी में आयोजित किया गया था। सीसीएलटी, आईआईटी भिलाई का एक रिसर्च सेंटर है जो सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और टिकाऊ विकास के क्षेत्रों में सामाजिक रूप से असरदार रिसर्च पर काम करता है। ’प्रातिज्ञ’ अकादमी का एक नियमित कार्यक्रम है, जिसमें संगीत, नृत्य, नाटक और लोक व आदिवासी कलाओं के जाने-माने कलाकार और विद्वान व्याख्यान-प्रदर्शन के ज़रिए अपने अनुभव साझा करते हैं। छत्तीसगढ़ में आयोजित होने वाला ’प्रातिज्ञ’ का यह पहला संस्करण है।


इस कार्यक्रम में राज्य की शास्त्रीय, लोक और आदिवासी नृत्य शैलियों के तीन जाने-माने कलाकारों ने व्याख्यान-प्रदर्शन दिएरू रायगढ़ घराने के मशहूर कथक गुरु और पद्म श्री व संगीत नाटक अकादमी रत्न फेलोशिप पाने वाले श्री रामलाल बारेठ; बैगा नृत्य गुरु और पद्म श्री व संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता श्री अर्जुन सिंह धुर्वे; और नाचा (लोक थिएटर) के कलाकार व संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता श्री काशीराम साहू।

कार्यक्रम में पद्म श्री और बस्तर बैंड के संस्थापक अनूप रंजन पांडे और उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार विजेता श्री धनीराम कड़ामिया भी मौजूद थे। आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर प्रो. राजीव प्रकाश ने स्वागत भाषण दिया और कलाकारों का सम्मान किया। अपने स्वागत भाषण में, प्रो. प्रकाश ने कहा कि ‘प्रातिज्ञ’ छत्तीसगढ़ की समृद्ध और विविध कलात्मक विरासत को बचाने और उसे आगे बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि आईआईटी भिलाई स्कूल और कॉलेज के शिक्षकों और छात्रों को कलाकारों से जोड़कर और इसे पाठ्यक्रम में शामिल करके समृद्ध संस्कृति और कला को बचाने और बढ़ावा देने की पहल कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘प्रातिज्ञ’ जैसे कार्यक्रम छात्रों को राज्य की सांस्कृतिक और कलात्मक विरासत के बारे में और जानने और सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और इन कलाओं को सीखने में उनकी रुचि जगाते हैं।


इस कार्यक्रम में गुरुओं और उनके शिष्यों के व्याख्यान-प्रदर्शन शामिल थे। पहले हिस्से में श्री रामलाल बारेठ के शिष्यों ने कथक की प्रस्तुति दी, जिसके बाद श्री बारेठ ने व्याख्यान-प्रदर्शन दिया। इसमें उन्होंने रायगढ़ बंदिश और तराना की बारीकियों और खासियतों के बारे में बताया। उनके लेक्चर ने दर्शकों को उस्ताद से कथक के रायगढ़ घराने की अनोखी शैली को समझने का शानदार मौका दिया। श्री काशी राम साहू ने एक व्याख्यान-प्रदर्शन दिया जिसमें दिखाया गया कि कैसे श्नाचाश् कहानी सुनाने के ज़रिए सामाजिक मुद्दों पर बात करते हुए हास्य और व्यंग्य का मेल बिठाता है। छत्तीसगढ़ी बोली में श्री साहू की कॉमेडी स्केच की एकल प्रस्तुति ने श्नाचाश् के हल्के-फुल्के लेकिन व्यंग्यात्मक अंदाज़ को पेश किया। ‘प्रातिज्ञ’ के आखिरी हिस्से में श्री अर्जुन धुर्वे और उनके दल ने बैगा नृत्य का व्याख्यान-प्रदर्शन दिया। श्री धुर्वे ने बताया कि कैसे नृत्य और संगीत बैगा संस्कृति के रोज़मर्रा के जीवन और रीति-रिवाजों का अहम हिस्सा हैं। इस प्रदर्शन में बैगा समुदाय के अलग-अलग समारोहों के दौरान किए जाने वाले नृत्य और गीत शामिल थे, जिन्होंने बैगा संस्कृति के जीवंत रंगों और लय को दिखाया।
कलाकारों को आईआईटी भिलाई के रजिस्ट्रार विंग कमांडर डॉ. जयेश चंद्र एस. पाई ने सम्मानित किया। संगीत नाटक अकादमी के श्री दीपक जोशी और सीसीएलटी के एसोसिएट हेड डॉ. अनुभव प्रधान ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।

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