दुर्ग।शास.वि.या.ता. स्ना. स्व. महाविद्यालय, दुर्ग के अर्थषास्त्र विभाग में आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत / 2047 विषय पर दो दिवसीय 15 एवं 16 फरवरी 2024 राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में फकीर मोहन स्टेट युनिवर्सिटी, उड़ीसा के पूर्व कुलपति डाॅ. कुमार बी.दास, विषेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे क्।टट इंदौर के प्रो. डाॅ. कन्हैया आहुजा, के जनरल सेकेट्ररी एवं रविशकर शुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर के प्रो. डाॅ. आर.के. ब्रम्हे तथा प्रबंध निदेषक भारती विष्वविद्यालय, दुर्ग के डाॅ. आर.एन. सिंह तथा अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. एस.एन. झा उद्घाटन सत्र मेें Key note Speaker (आधार वक्तव्य दिल्ली विष्वविद्यालय के अर्थषास्त्र विभाग के प्राध्यापक डाॅ. अष्विनी महाजन ने यह बताया कि किस प्रकार प्राचीन काल से ही भारतीय अर्थव्यवस्था अत्यंत सुदुढ़ एवं आत्मनिर्भर रही है। उन्होंने कहा कि भारत को यूंह ी सोने की चिड़िया नहीं कहा जाता था। डाॅ. अष्विनी महाजन ने आरंभ से वर्तमान तक भारतीय अर्थव्यवस्था की नीतियों पर प्रकाष डालते हुए कहा कि गुलामी तथा अन्य कारणों से हमारी जीडीपी में गिरावट दर्ज हुई है, किंतु 2047 तक हम निष्चय ही सम्पूर्ण आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सफल होंगे।


इसके पूर्व विषिष्ट अतिथि डाॅ. आर.एन. सिंह ने कहा कि 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र का दर्जा दिलाने में युवाओं की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण होगी और इसके लिये युवाओं को विवेकानंद के आदर्ष को अपनाना होना, जोखिम उठाना होगा और स्वयं को स्किल्ड बनाना होगा। कार्यक्रम के विषिष्ट अतिथि डाॅ. कुमार बी. दास ने कहा कि संगोष्ठी के आयोजकों ने एक बेहद सामयिक विषय को चुना है। आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत 2047 यह वह स्वप्न है जो हमने खुली आंखो से देखा है, हमारे पास मानव संसाधन अपार मात्रा है, जिसके उपयुक्त प्रयोग से हम अपनी अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बना सकते है। अर्थषास्त्र की विभागाध्यक्ष डाॅ. षिखा अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये हमें दृढ़ संकल्पित होना होगा। संगोष्ठी के प्रारंभ में स्मारिका का विमोचन भी अतिथियों के द्वारा किया गया। संगोष्ठी की संयोजिका डाॅ. के. पद्मावती ने संगोष्ठी के उद्देष्य पर प्रकाष डालते हुए कहा कि आज भारत विष्व की एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना भारतीयों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को और भी समृध्द बनायेगी। संगोष्ठी के अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. एस.एन. झा ने यह विष्वास व्यक्त किया इस दो दिवसीय विचार-विमर्ष से निष्चय ही हम अपने देष को आत्मनिर्भर एवं विकसित अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचाने के प्रयासों में सफल होंगे। पं. रविषंकर शुक्ल विष्वविद्यालय , रायपुर के अर्थषास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष एवं इंडियन इकोनाॅमिक एसोसिएशन के जनरल सेके्रटरी डाॅ. आर. ब्रम्हे, शास. दिग्विजय महाविद्यालय, राजनांदगांव के प्रो. डाॅ. डी.पी. कुर्रे, डाॅ. के.सी. जैन पूर्व विभागाध्यक्ष हरिसिंह गौर विष्वविद्यालय, सागर, चैधरी चरण सिंह विष्वविद्यालय, मेरठ के अर्थषास्त्र विभाग के प्राध्यापक डाॅ. दिनेष कुमार, जैसे अनेक प्रतिष्ठित विषय विषेषज्ञ इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में सम्मिलित होंगे। देष के विभिन्न विष्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से प्राध्यापकगण व शोधार्थीगण ने अपनी रूचि राष्ट्रीय संगोष्ठी में दिखाई है। संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापकगण एवं विभिन्न महाविद्यालयों से आये प्राध्यापकगण, प्रतिभागीगण एवं छात्र-छात्राऐं बड़ी संख्या में उपस्थित रहें।






