मौर्यध्वज सेन
नगरी/सिहावा,बेलरगांव। नगरी विकास खण्ड के बेलरगांव तहसील से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित भुरर्सीडोगरी, आमगांव ,बरबांधा दो पहाड़ों के बीच कांकेर (उत्तर बस्तर) रोड़ से लगा हुआ है। स्वयंभू गणेश की महिमा बहुत ही चमत्कारी और अद्भुत शक्ति एवं लीला के साथ उदगम हुआ है। यहां पुरा पहाड़ी इलाका है।


यहां पर पेड़ पौधा प्राकृतिक सौंदर्य से गिरा हुआ है यहां जंगली जानवर भी सुशोभित है यहां जंगली जानवर भी आते जाते हैं।और विचरते हैं। इस स्वयंभू गणेश भगवान का जितना भी बखान किया जाए बहुत ही कम है। स्वयंभू श्री गणेश भगवान का उद्गम बहुत ही महत्वपूर्ण चमत्कार घटना के साथ प्रेरणा देते हुए लोगों के बीच में स्वयंभू गणेश भगवान 50 वर्ष से पूर्व दो पहाड़ों के बीच में प्रगंट हुए हैं।
और दोनों पहाड़ के बीच में तेंदू के बहुत से पेड़ पौधे थे ।जिसमें कच्चे तेंदू खाने के लिए आसपास की बच्चे भी आते थे ।इस बीच में से एक व्यक्ति लोकनाथ नाम का लड़का भी था। लोकनाथ जो स्वयंभू गणेश भगवान के ऊपर बैठकर कच्चे तेंदू को उसके सर से फोड़ते थे।उसी समय उस व्यक्ति ने गणेश भगवान का सूंड को तोड़ दिया और कुछ दुर में जाकर फेंक दिया। जिसके बाद गणेश भगवान की क्रोध से लोकनाथ का तबियत बहुत ही खराब हो गया। जिससे वह दिमागी हालत से पागल सा हो गया।
जिसके बाद उसके पिता ने एक ज्योतिषीय के पास लेके गया। ज्योतिष ने अपने विचार के द्वारा स्वयंभू गणेश भगवान या हाथी का स्वरूप बताया। उनके बाद लोकनाथ से सारी बात पूछा गया की सच्ची बात बताओ उसने डरे और सहमे हुए थे और बताने के लिए कुछ राजी नहीं हुए। उसके साथ तेंदू खाने गए लड़के एवं लड़की को पूछा गया फिर उसके दोस्तों ने बारिकी से बताया कि यह एक हाथी नुमा पत्थर का सूंड को तोड़कर फेंक दिया है।
फिर ग्रामीणों ने उस स्थान पर जाकर देखा तो पूरी तरह सूंड टुटा हुआ पाया था। फिर उस सूंड को उठाकर सिद्धी विनायक गणेश के टूटे हुए स्थान पर रखने वह फिर लग गया।वह कुछ दिन में फिर जुड़ गया जो आज भी किसी प्रकार का टूटने का पहचान नहीं है।आज स्वयंभू गणेश भगवान का पूरी तरह से मंदिर बन गया।आज उसके आसपास के जगहों पर विश्वकर्मा मंदिर, राधाकृष्णन मंदिर, शिवलिंग मंदिर,ओर हनुमान जी का मंदिर भी है।
नवरात्रि में ज्योति भी प्रज्वलित करते हैं श्रद्धालुओं ने।इस स्वयंभू गणेश भगवान का महिमा बहुत ही अपरंपार है। स्वयंभू गणेश भगवान से बरबांधा, सिंगनपुर,भुरर्सीडोगरी, आमगांव , जैतपुरी,घुरावड़ ,आमाली सहित आसपास के गांवों से भक्तजन जो है।इस स्थान से जुड़े हुए हैं और हर प्रकार के धार्मिक कार्यक्रम में पूर्णतः सहयोग मिलता है ।





