सिहावा अंचल में सेन महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई गई

समाज के बुजुर्गों व अधिकारी कर्मचारियों का हुआ सम्मान।

खीर पुड़ी प्रसादी वितरण के साथ हुआ भंडारे का आयोजन।

मौर्यधवज सेन
नगरी/सिहावा, बेलरगांव। चित्रोत्पल्ला महानदी के पवित्र तट कर्णेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण देऊरपारा सिहावा में तहसील सेन समाज नगरी एवं बेलरगांव के द्वारा समाज के आराध्य संत शिरोमणि सेन जी महराज की 723वी जयंती 17 अप्रैल को बड़ी धूमधाम से मनाई गई। इस दिन तहसील नगरी एवं बेलरगांव अंतर्गत आने वाले जोन- नगरी, सिहावा, बेलरगांव, सांकरा, गटटासिल्ली एवं बोरई क्षेत्र के सेन समाज के लोग सुबह से ही मंदिर प्रांगण में एकत्रित होकर सर्वप्रथम परिसर स्थित विष्णु भगवान व सेन महराज के तेलचित्र पर पुरोहित गोस्वामी जी के मंत्रोच्चार के साथ पूजन अर्चन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया इसके बाद सभा का आयोजन किया गया।


सेन जयंती के मुख्य समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक डॉ लक्ष्मी ध्रुव शामिल हुए उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में प्रत्येक समाज संगठित होकर अपना व अपने समाज का विकास कर रहा है इसी कड़ी में सेन समाज द्वारा इस प्रकार संगठित होकर कार्य करना प्रशंसनीय है। उन्होंने समाज के लोगों को कहा कि आज के भारत में नई टेक्नोलॉजी आ गई है जिससे कि आपके परंपरागत कार्य में भी परिवर्तन दिखाई दे रहा है उन नए टेक्नोलॉजी को अपनाकर आप स्वयं एवं समाज का विकास कर सकते है उन्होंने जोर देते हुए कहा की शिक्षा समाज का अति आवश्यक भाग है आप अपने बच्चो को बेहतर से बेहतर शिक्षा देकर उन्हें उच्च पदों में पहुंचने में सहायता करें। उन्होंने समाज के मांग पर सामुदायिक भवन निर्माण कार्य का घोषणा किया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि ब्लाक कांग्रेस कमेटी बेलारगांव के अध्यक्ष कैलाशनाथ प्रजापति ने भी समाज के सभी लोगों को संगठित होकर कार्य कर समाज में अपना योगदान देने की बात कही।
वहीं मुख्य कार्यक्रम के बाद दूसरे क्रम में प्रतिभा सम्मान कार्यक्रम रखा गया जिसमें समाज के गौरव जो विभिन्न क्षेत्रों में शासकीय अशासकीय पदों में आसीन होकर सेवा दे रहे है और स्वयं व समाज का नाम रोशन कर रहे स्वजातीय जनों का स्वागत सम्मान कार्यक्रम रखा गया जिसमें विशेष अतिथि के रूप में कर्णेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विकल गुप्ता विराजमान हुए इस कार्यक्रम में तहसील नगरी एवं बेलरगांव के समस्त अधिकारी कर्मचारी महिला पुरुषों का सम्मान श्रीफल व गमछा भेंटकर किया गया।


उक्त दोनों कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सेन समाज के अध्यक्ष प्रकाश सेन ने कार्यक्रम में पधारे समस्त अतिथियों, अधिकारी कर्मचारी प्रभाग के सदस्यों, स्वजातीय बंधुओ, वरिष्ठजनों, माताओं, बहनों और युवा साथियों को धन्यवाद देते हुए आभार व्यक्त किया साथ ही भविष्य में होने वाले कार्यक्रम में पुनः सहयोग की अपील किया।कार्यक्रम के अंत में विधायक डॉ लक्ष्मी ध्रुव को अभिनंदन पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट किया गया।
कार्यक्रम का संचालन सचिव देवेन्द्र सेन ने किया।
सेन जयंती समारोह में विशेष अतिथि के रूप में भूषण साहू अध्यक्ष ब्लाक कांग्रेस कमेटी नगरी, रूद्रप्रताप नाग विधायक प्रतिनिधि नगरी, भानेंद्र ठाकुर पूर्व अध्यक्ष ब्लाक कांग्रेस कमेटी नगरी, राजेंद्र सोनी सदस्य कृषि उपज मंडी समिति नगरी के साथ समाज के वरिष्ठजन भानेंद्र सुरेशा, उदयलाल सेन, भरतलाल सेन, आनंदराम सेन, हेमलाल सेन, सुरेंद्र सेन, उमेंद्र सेन, प्रताप सुरेशा, तकेश सेन, बनवाली सेन, टिकम सेन, देवानंद सेन, बेनीराम सेन उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में समाज के अध्यक्ष प्रकाश सेन, सचिव देवेन्द्र सेन, सहसचिव भुनेश्वर सेन, कोषाध्यक्ष मनीष सेन, जोन अध्यक्षगण भगवान सिंह सेन, रूपसिंह सेन, यक्कु सेन, संतराम सेन, विनोद सेन, पीलाराम सेन, दिलीप सेन, हेमलाल सेन, चैतुराम सेन सहित बड़ी संख्या में आए समाज के लोगों की उपस्थिति रही।


सेन महराज का जीवन परिचय
समाज के संरक्षक भानेंद्र सुरेशा ने समाज के आराध्य संत सेन महराज के जीवन का परिचय देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश राज्य के बांधवगढ़ के सेनपुरा नामक गांव में सेन महराज रहते थे उनका नाम नंदा नाई था, वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे, वे प्रतिदिन प्रातःकाल उठकर नित्यक्रिया कर भगवान विष्णु जी का पूजन अर्चन,भजन व सत्संग करने के बाद उस राज्य के राजा वीरसिंह के यहां जाकर उनका क्षौरकार्य जैसे दाढ़ी बनाना, नाखून काटना, मालिश करना आदि करते थे, एक दिन नंदा जी के निवास के समीप साधु संतो की टोली पहुंचती है उनके द्वारा किए गए भजन, सत्संग में नंदा जी भी शामिल होकर भगवान की भक्ति भजन में लीन हो जाते हैं जिस कारण वे राजा वीरसिंह के पास क्षौरकार्य में जाने के लिए भूल जाते हैं, इस दुविधा को भगवान विष्णु जी देखते है और अपने भक्त का मान रखने के लिए वे स्वयं नंदा नाई का वेश धारण कर राजा के पास क्षौरकार्य के लिए पहुंच जाते है उनके द्वारा किए गए कार्य से राजा का थकान दूर हो जाता है और वे आनंदित हो जाते है इधर नंदा जी का भजन समाप्त हो जाता है तब उन्हे याद आता है की राजा के पास उनको क्षौरकार्य के लिए जाना है और जाने का नियत समय बीत चुका है फिर भी वे राजमहल पहुंच जाते हैं लेकिन राजा को आराम करता देखकर वह अचंभित हो जाते है और सोचने लगते है कि मेरे अनुपस्थिति में उनका क्षौरकार्य किसने किया होगा तब अपनी शंका का समाधान करने वे राजा को इस बारे में पूछते है तभी राजा यह बताते हैं कि अभी अभी तुम्ही ने तो मेरा क्षौरकार्य किया है जिससे कि मेरा पूरा थकान समाप्त हो गया है, जिसके बाद नंदा जी पूरी घटना से राजा को अवगत कराते है इस पर उन दोनो को जानकारी होता है कि स्वयं विष्णु भगवान ने नंदा नाई का रूप धारण कर राजा का क्षौरकार्य किया है, नंदा जी के भक्ति परायणता से प्रसन्न होकर राजा उनको राजगुरु का पद प्रदान कर सेन महराज के नाम से सुशोभित कर सम्मान देते है।
सुरेशा जी ने आगे कहा की नंदा महराज अपने भक्ति के बल पर समाज में सत्य, अहिंसा व सद्भावना का संदेश देकर अपने जीवनकाल तक सामाजिक जनजागरण में लगे रहे और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने में अपनी प्रमुख भूमिका निभाई है, वे अपने जीवनकाल के अंत समय में काशी चले गए और वही भगवान भजन, सत्संग व उपदेश देने में लगे रहे।