सेवा, संस्कार और संगठन ही शिष्य मंडल की पहचान : बागेश्वर सरकार, राष्ट्रीय शिष्य मंडल सम्मेलन में दुर्ग के खंड पाटन की सहभागिता, देशभर के 210 मंडल हुए शामिल

पाटन। बागेश्वर धाम में पहली बार देशव्यापी शिष्य मंडल सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए 210 शिष्य मंडलों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सम्मेलन का उद्देश्य शिष्य मंडलों के बीच समन्वय को मजबूत करना, सेवा कार्यों को विस्तार देना तथा आगामी धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों की रूपरेखा तैयार करना रहा।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शिष्य मंडल केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और मानवता की सेवा के लिए भी समर्पित भाव से कार्य करें। उन्होंने कहा कि सेवा, संस्कार और संगठन ही शिष्य मंडलों की वास्तविक पहचान है। साथ ही कन्या विवाह महोत्सव, गुरु पूर्णिमा महोत्सव एवं गुरुदेव जन्मोत्सव जैसे प्रमुख आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न शिष्य मंडलों के प्रभारी एवं सह-प्रभारियों ने महाराज जी से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित सेवा और धार्मिक गतिविधियों की जानकारी साझा की। शिष्य मंडलों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे पवन मिश्रा ने बताया कि आगामी 4 जुलाई को दिल्ली में बागेश्वर महाराज का जन्मोत्सव सेवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें सभी शिष्य मंडलों की महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी।

उन्होंने बताया कि पहली बार आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने शिष्य मंडलों को एक साझा मंच प्रदान किया है, जिससे संगठनात्मक विस्तार और समाजहित के कार्यों को नई दिशा मिलेगी। सम्मेलन के बाद सभी प्रतिनिधियों ने सेवा, संस्कार और सनातन जागरण के कार्यों को और अधिक गति देने का संकल्प लिया।

सम्मेलन में बागेश्वर धाम शिष्य मंडल पाटन की ओर से भी सक्रिय सहभागिता रही। मंडल के पदाधिकारियों एवं गुरु भाई-बहनों ने गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सनातन धर्म, सेवा और संगठन विस्तार के कार्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर शिष्य मंडल दुर्ग के खंड पाटन से वर्षा राज चौहान (दुर्ग), लक्ष्मी राठी (जामगांव), यतीश शर्मा (दुर्ग), विजय बंछोर (पाटन), मोनिका बैतूल (दुर्ग) सहित अन्य गुरु भाई-बहनों ने भाग लेकर पूज्य गुरुदेव भगवान श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। सभी ने सेवा, संस्कार एवं सनातन जागरण के कार्यों को समाज के बीच और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने का संकल्प व्यक्त किया।