आशीष दास

कोंडागांव । राज्य सरकार द्वारा हर जगह पर शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। करोड़ों रुपये सरकार द्वारा स्कूल भवन बनाने के लिए दिए जाते हैं। पर भ्रष्ट ठेकेदार के द्वारा अधिकारियों से मिली भगत करके निम्न स्तर के काम कर लाखों रुपये का भ्रष्टाचार कर राशि का आहरण कर लेते हैं।
वहीं जिले के अनेक ऐसे स्कूल के शिक्षक हैं जो शिक्षकीय कार्य छोड़कर राजनीतिक पहुंच के बलबूते पर विभिन्न कार्यालयों में अटैच है और स्कूलों में शिक्षकों की कमी का भरपाई अतिथि शिक्षकों के रूप में किया जा रहा है।
ऐसा ही मामला जिला मुख्यालय से लगे राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित बनियागाव में प्राथमिक शाला भवन की बहुत ही दयनीय स्थिति में है जहा बैठकर पढ़ाना खतरे से खाली नहीं।
प्राथमिक शाला मरारपारा की जिसका छत कभी भी गिर सकती है। शिक्षक बच्चों को उक्त जर्जर भवन में बैठाने से डरते हैं। कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक बच्चों को अलग से एक ही भवन में बिठाकर पढ़ा रहे हैं। बच्चों के लिए मध्यान भोजन बनाने का शेड भी जर्जर स्थिति में है जहां रसोईया बरसात के दिन बड़ी मुश्किल से खाना बनाकर बच्चों को खिला रहे हैं। इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को सूचना व पत्राचार के माध्यम से अवगत कराया गया किन्तु सुनने वाला कोई नहीं। अब करे तो करे क्या? शायद शासन प्रशासन को किसी बड़े अनहोनी का इंतजार है जब कोई अनहोनी होगी तब ही प्रशासन जागेगा।
विषय शिक्षक 3 साल से बीआरसी में अटैच-
वहीं जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत बनियागाव के शासकीय उच्च्तर माध्यमिक विद्यालय जिसमें कुल 600 के आसपास बच्चे अध्ययनरत है, जहा पर पदस्थ एक मात्र गणित शिक्षक निसार अहमद कुरैशी जो कि शाला में पदस्थापना होने के कुछ दिन बाद से ही कार्यालय बीआरसी कोड़ागाव में अटैच कराये 3 साल हो गये हैं, शाला में अन्य कोई विषय शिक्षक के नहीं होने से बच्चो की पढ़ाई नहीं हो पा रही है। जब कि 3 साल से अधिक समय हुए शिक्षक के द्वारा पदस्थापना शाला से वेतन आहरण हो रहा है l शिक्षक के मूल पदस्थापना मे वापसी हेतु तात्कालिक कलक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को गाव के सरपंच, उप सरपंच, पंच एव ग्रामीणों द्वारा निवेदन किया गया था, किन्तु आज पर्यंत उक्त शिक्षक को मूल पदस्थापना पर भेजा नहीं गया। जब उच्च अधिकारियों से दूरभाष पर शिक्षक को नहीं भेजे जाने का कारण जानना चाहा गया तो उनका ज़वाब था हमे राजनीतिक दबाव दिया जा रहा है, यदि शिक्षक ही राजनीतिक पहुच का फायदा उठाकर मन माफिक स्थान पर रहेगे तो शिक्षा की स्थिति क्या होगी? उक्त शिक्षक पर तत्कालीन कलेक्टर एव जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई, किन्तु वर्तमान कलक्टर से उम्मीद हैं कि त्वरित कार्रवाई करते हुए उक्त शिक्षक को अपने मूल पदस्थापना मे भेजने की कार्रवाई करेगे।
जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि-
इस विषय में जिला शिक्षा अधिकारी अशोक पटेल का कहना है कि पूरे जिले में 301 जर्जर स्कूल है उन सभी स्कूलों का स्टीमेट बनाकर हमने डीपीआई को भेजा है। अभी हड़ताल के कारण थोड़ा विलंब हो रहा है। रायपुर से संपर्क करने से पता चला कि बहुत जल्द लगभग आधे स्कूल की स्वीकृति हमें मिल रही है उसमें जो भी मरम्मत का कार्य है उसे हम पूरा करवाएंगे, और विषय शिक्षक के बारे में कहा कि इस शिक्षक के बारे में मेरे पास लेटर आया हुआ है इनके वापसी के लिए हमने फाइल बनाया है।






