संजय साहू

अंडा। बालोद व दुर्ग जिले की सीमा पर बसा श्री विष्णु धाम महायज्ञ ओटेबंद बगीचा गांव गुंडरदेही ब्लॉक में आता है. इस गांव के मंदिरों की अपनी विशेष पहचान है. इस क्षेत्र में भगवान विष्णु का काफी प्रसिद्ध मंदिर है. जिसमें विष्णु क्षीरसागर की मुद्रा में विराजमान है. साथ ही माता लक्ष्मी उनके पैर दबाते हुए नजर आ रही है. हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष पर यहां 11 दिनों का मेला लगता है. जिसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं।
इस बार श्री विष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन कल 19 फरवरी गुरुवार से 01 मार्च रविवार 2026 तक किया जा रहा है। यह पावन आयोजन क्षेत्र में धर्म, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का विशेष संदेश लेकर आ रहा है।
इस अवसर पर श्रीमद् भागवत कथा का पावन वाचन पूज्य संत श्री राजीव नयन जी महाराज (श्रीधाम वृन्दावन) के श्रीमुख से किया जाएगा। कथा का आयोजन 21 फरवरी से 01 मार्च 2026 तक प्रतिदिन दोपहर 1:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक संपन्न होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं शामिल होने की अपील किया है।
भगवान विष्णु की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां भगवान विष्णु क्षीरसागर मुद्रा में शेषनाग की शैय्या पर विश्राम करते हुए विराजमान हैं। उनके चरणों में माता लक्ष्मी सेवा भाव से उपस्थित हैं। यह दृश्य सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु की दिव्य लीला का प्रतीक माना जाता है।
सनातन धर्म में भगवान विष्णु को त्रिदेवों में ‘पालनहार’ की उपाधि प्राप्त है। ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता और भगवान शिव संहारक माने जाते हैं, वहीं भगवान विष्णु सृष्टि का पालन करते हैं। जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा और धर्म की हानि हुई, तब-तब भगवान विष्णु ने विभिन्न अवतार लेकर मानवता की रक्षा की। उनके दशावतार—मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि—धर्म स्थापना के प्रतीक माने जाते हैं।
क्षीरसागर में शयन की मुद्रा का आध्यात्मिक अर्थ भी गहरा है। यह दर्शाता है कि सृष्टि का संचालन भले ही अनंत गतिविधियों से भरा हो, परंतु परमात्मा शांत और संतुलित भाव से सबका संचालन करते हैं। शेषनाग अनंत काल का प्रतीक है और क्षीरसागर पवित्रता व शुद्धता का संकेत देता है।
ओटेबंद के इस मंदिर में स्थापित मूर्ति न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि कला और स्थापत्य की दृष्टि से भी आकर्षण का केंद्र है। यहां दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु के चरणों में सुख-शांति, समृद्धि और संतोष की कामना करते हैं।
मंदिर परिसर में स्थित कदंब वृक्ष को भी श्रीकृष्ण और राधारानी की उपस्थिति से जोड़ा जाता है, जिससे यह स्थान वैष्णव परंपरा का प्रमुख केंद्र बन गया है। फाल्गुन शुक्ल पक्ष में आयोजित 11 दिवसीय महायज्ञ और भागवत कथा के दौरान यहां भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण निर्मित होता है।
ओटेबंद बगीचा का यह प्राचीन विष्णु मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जहां भगवान विष्णु की कृपा से श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होने की अटूट आस्था आज भी कायम है। बाजार ठेकेदार गुप्ता व झुला ठेकेदार अनिल सिन्हा ने बताया इस मेला में बडे बडे झुला व मीना बाजार लगाये हैं सभी प्रदेशवासियों से अपिल हैं कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंच कर मीना बाजार मेला का आनंद उठाये।







