संजय साहू

अंडा। दुर्ग जिला और बालोद जिला के मध्य खप्परवाड़ा से 3 कि. मी. के दूरी पर श्री
विष्णु धाम महायज्ञ (मंदिर) ओटेबंद बगीचा में श्री धाम
श्रीमद् भागवत मानव जीवन की ब्रह्म संहिता है संत राजेंद्र जी महाराज श्रीमद् भागवत महापुराण द्वितीय दिवस की पावन कथा की बेला में श्री धाम वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय संत राजेंद्र जी महाराज की अमृत में वाणी के द्वारा श्रीमद् भागवत कथा का दिव्य वाचन किया जा रहा है प्रथम स्कंध की कथा में महाराज जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत का प्रारंभ है ज शब्द से होता है और मां शब्द में विश्राम होता है ।


जिसके जीवन में भागवत का श्रवण कर लिया जाता है उसको फिर यमराज भी कभी स्पर्श नहीं करता भागवत के महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि वेदव्यास जी महाराज ने 17 पुराण की रचना करने के बाद उनके जीवन में शांति नहीं प्राप्त हुई तब विचलित मन से भ्रमण करते-करते नारद जी महाराज के पास पहुंचे नारद जी ने पूछा कि चिंता का कारण क्या है तब वेद व्यास जी ने कहा हमने 17 पुराने की रचना किया इसके बाद भी हमारे जीवन में शांति नहीं तब कोई हमें उपाय बताएं तब नारद जी महाराज ने कहा कि अपने ब्रह्म पुराण लिखा ब्रह्मा जी के लिए विष्णु पुराण लिखा विष्णु भगवान के लिए नारद पुराण लिखा नारद जी के लिए लेकिन अपने भक्त और भगवान की महिमा का वर्णन नहीं किया इसलिए श्रीमद् भागवत में भक्तों की विशेष महिमा जिसे ध्रुव जी महाराज प्रहलाद जी महाराज जड़ भरत जी महाराज ऐसी अनेक कथाओं का वर्णन प्राप्त होता है इसलिए श्रीमद् भागवत पुराण नहीं अपित महापुराण है श्रीमद् भागवत में किसी का मंगलाचरण नहीं है सत्यम परम धीमहि शब्द का के बदक व्यास जी ने सत्य स्वरूप का वर्णन किया और सत्य से बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है गोस्वामी जी रामचरितमानस में लिखते हैं ।


धर्म न दूसर सत्य समाना आगम निगम पुराण मखाना राम परम धीमहि कहते राम भक्तों का ग्रंथ हो जाता कृष्ण परम धीमहि कहते कृष्ण भक्तों का अधिकार पूर्वक ग्रंथ हो जाता शिवम परम धीमहि कहते शिव भक्तों का ग्रंथ हो जाता है।
कथा का समय दोपहर 1:00 से लेकर के सायं 5:00 तक समस्त क्षेत्रवासी अधिक से अधिक संख्या में आकर के कथा का लाभ प्राप्त करें ।






