सफलता की कहानी : 21 दिनों में ₹18 हजार तक का लाभ,ब्रूडिंग उद्यम से आत्मनिर्भर बनीं कुकरैल संकुल की देवबत्ती दीदी

नगरी/सिहावा ,बेलरगांव।इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (IFC) परियोजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रही है। इसी परियोजना के माध्यम से नगरी विकासखंड के कुकरैल संकुल की निवासी देवबत्ती दीदी ने ब्रूडिंग उद्यम अपनाकर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है।

देवबत्ती दीदी ने IFC परियोजना के अंतर्गत प्राप्त प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन के आधार पर 1000 चूजों की क्षमता वाला ब्रूडिंग सेंटर स्थापित किया। उन्होंने हैचरी से प्राप्त नवजात चूजों का 21 दिनों तक वैज्ञानिक पद्धति से पालन-पोषण किया तथा तैयार चूजों को अपने संकुल की महिला समूह सदस्यों एवं ग्रामीण हितग्राहियों को विक्रय किया।

इस उद्यम से देवबत्ती दीदी को मात्र 21 दिनों में ₹17,000 से ₹18,000 तक का लाभ प्राप्त हुआ। इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें एक सफल महिला उद्यमी के रूप में नई पहचान दिलाई है।

देवबत्ती दीदी बताती हैं कि IFC परियोजना से जुड़ने के बाद उन्हें व्यवसाय संचालन, चूजों के प्रबंधन, टीकाकरण, पोषण एवं विपणन संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त हुईं। इसी ज्ञान और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने अपने उद्यम को सफलतापूर्वक संचालित किया।

उनकी सफलता का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण चूजों की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र की अन्य महिलाएं भी कुक्कुट पालन व्यवसाय से जुड़ रही हैं तथा अपनी आय बढ़ाने के अवसर प्राप्त कर रही हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।
देवबत्ती दीदी की इस सफलता के पीछे जिला प्रशासन एवं आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। माननीय कलेक्टर महोदय के मार्गदर्शन, जिला पंचायत CEO महोदय के दूरदर्शी नेतृत्व एवं महिला सशक्तिकरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, जिला मिशन प्रबंधक (DPM) श्री अनुराग सर के नेतृत्व, IFC एंकर श्री कमल नयन के सतत सहयोग, CRP दीदी, PRP दीदी तथा कुकरैल संकुल की सभी पदाधिकारी दीदियों के निरंतर प्रोत्साहन और सहयोग से यह सफलता संभव हो सकी है।
आज देवबत्ती दीदी कुकरैल संकुल सहित पूरे नगरी विकासखंड की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह सिद्ध करती है कि यदि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि समाज में एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान भी स्थापित कर सकती हैं।

देवबत्ती दीदी का संदेश: “मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से हर महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। IFC परियोजना ने मुझे रोजगार, सम्मान और नई पहचान प्रदान की है।”